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राम मंदिर चंदा विवाद पर पहली बार बोले मोहन भागवत, सवाल पर सिर्फ इतना कहा- ‘राम-राम’

नागपुर में पत्रकारों के सवाल पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। इससे पहले सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले कथित चंदा हेराफेरी मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को नागपुर में पत्रकारों ने जब उनसे अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा विवाद पर सवाल पूछा, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त जवाब देते हुए केवल “राम-राम” कहा और आगे बढ़ गए। उनकी यह प्रतिक्रिया अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

पत्रकारों ने मोहन भागवत से पूछा था कि कथित चंदा हेराफेरी के आरोपों से भगवान राम में लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाने की कोशिश हुई है। हालांकि उन्होंने इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की और केवल “राम-राम” कहकर अपनी प्रतिक्रिया समाप्त कर दी। उनके इस संक्षिप्त उत्तर को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं।

भागवत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहले ही इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख चुके हैं। उन्होंने कथित चंदा गड़बड़ी के मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि इससे रामभक्तों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की थी।

दत्तात्रेय होसबाले ने अपने बयान में कहा था कि यदि किसी स्तर पर चंदे के उपयोग में अनियमितता या हेराफेरी हुई है, तो जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ तत्व इस विवाद का इस्तेमाल हिंदू धर्म और धार्मिक आस्थाओं को बदनाम करने के लिए करने की कोशिश कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने रामभक्तों से संयम बनाए रखने और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की थी।

उधर, राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि राम मंदिर निर्माण को सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती रही है, तो विवाद सामने आने के बाद जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। विपक्ष ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

इस बीच, विवाद सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उनके इस्तीफे के बावजूद राजनीतिक बयानबाजी जारी है और विपक्ष उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियों ने अभी तक कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और जिम्मेदारियों को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। तब तक मामले में लगाए गए आरोपों और विभिन्न पक्षों के दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच, ट्रस्ट की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों के रुख पर सभी की नजर रहेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित चंदा विवाद में किसकी क्या भूमिका रही और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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