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PoK में 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा, गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव पर भारत ने जताई आपत्ति

7 जून को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सुरक्षा, मानवाधिकार कार्यकर्ता ने पीएम मोदी से की हस्तक्षेप की मांग

PoK Heavy Military Deployment: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में 7 जून 2026 को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव के मद्देनजर लगभग 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। इस बीच भारत ने इन चुनावों को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है और एक बार फिर स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है।

चुनावी प्रक्रिया पर भारत का कड़ा रुख

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र में चुनाव कराने जा रहा है, वह भारतीय क्षेत्र है, जिस पर उसका अवैध कब्जा है। मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत का कहना है कि इस तरह के चुनाव या प्रशासनिक कदम क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते।

मानवाधिकार और राजनीतिक दमन का मुद्दा उठाया

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन, राजनीतिक प्रतिबंधों और आर्थिक शोषण जैसे गंभीर मुद्दे लंबे समय से मौजूद हैं। भारतीय पक्ष का मानना है कि चुनाव कराना इन समस्याओं से ध्यान हटाने का प्रयास हो सकता है, जबकि स्थानीय लोगों को अब भी कई मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया है।

14,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का दावा

मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने दावा किया है कि चुनाव से पहले क्षेत्र में 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी कथित तौर पर 4 जून 2026 को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र के आधार पर सामने आई है, जिसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बलों की मांग की गई थी।

‘दोहरी नीति’ अपनाने का आरोप

अमजद अयूब मिर्जा ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की कथित दोहरी नीति को दर्शाता है। उनके अनुसार, एक ओर सरकार शांतिपूर्ण आंदोलनों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर चुनाव से पहले भारी सुरक्षा तैनाती की तैयारी की जा रही है। उनका आरोप है कि इससे राजनीतिक गतिविधियों और जन आंदोलनों पर दबाव बढ़ सकता है।

पीएम मोदी से हस्तक्षेप की अपील

मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाएं। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अधिकारों की मांग करने वाले लोगों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और कई मामलों में गिरफ्तारियां भी की जा रही हैं।

भारत ने फिर दोहराया अपना दावा

भारत ने एक बार फिर साफ किया है कि वह पाकिस्तान द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करता। भारतीय सरकार का कहना है कि चुनावी गतिविधियां या प्रशासनिक फैसले इस तथ्य को नहीं बदल सकते कि ये क्षेत्र भारत का हिस्सा हैं और पाकिस्तान का वहां कब्जा अवैध है।

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