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नोटबंदी, अतीक का काला धन और रिवरफ्रंट घोटाला; अखिलेश पर राजभर का बड़ा हमला

एसबीएसपी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए। नोटबंदी, अतीक अहमद के कथित काले धन और गोमती रिवरफ्रंट परियोजना को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

नोटबंदी, अतीक का काला धन और रिवरफ्रंट घोटाला; अखिलेश पर राजभर का बड़ा हमला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। नोटबंदी, माफिया अतीक अहमद के कथित काले धन और गोमती रिवरफ्रंट परियोजना को लेकर दिए गए उनके बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2016 में लागू की गई नोटबंदी के कारण अतीक अहमद का कथित काला धन बेकार हो गया था। राजभर का कहना है कि यदि नोटबंदी नहीं हुई होती तो उस धन का इस्तेमाल वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किया जा सकता था।

राजभर ने आगे आरोप लगाया कि नोटबंदी के बाद चुनावी खर्चों को पूरा करने के लिए गोमती रिवरफ्रंट परियोजना के फंड का इस्तेमाल किया गया। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज पेश नहीं किया है, लेकिन उनका दावा है कि उनके पास इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि समय आने पर वह सभी दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे और सच्चाई जनता के सामने रखेंगे।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी माहौल को देखते हुए ऐसे बयान राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बता रहे हैं।

गोमती रिवरफ्रंट परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित सरकारी योजनाओं में से एक रही है। समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान वर्ष 2015 में इसकी शुरुआत की गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य लखनऊ में गोमती नदी के किनारों का विकास करना और शहर को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना था। उस समय इसे अखिलेश यादव सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना माना गया था।

वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस परियोजना की जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान कई स्तरों पर कथित अनियमितताओं की बात सामने आई थी। रिपोर्टों में खर्च और वास्तविक कार्य के बीच अंतर की ओर संकेत किया गया था। इसके बाद मामला सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंचा। हालांकि अब तक किसी अदालत या आधिकारिक जांच रिपोर्ट में यह साबित नहीं हुआ है कि परियोजना के धन का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों के लिए किया गया था।

राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और धीरे-धीरे कई अहम तथ्य सामने आ रहे हैं। उनका दावा है कि आने वाले समय में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता को इंतजार करना चाहिए क्योंकि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और सच्चाई देर-सबेर सामने आ जाएगी।

अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा, “धैर्य रखिए, जेल में न एसी मिलेगा, न ट्विटर और न ही पीसी (प्रेस कॉन्फ्रेंस) कर पाएंगे।” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों और नेताओं ने इस बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है, जबकि राजभर के समर्थक इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी बेबाक आवाज कह रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आने वाले चुनावों को देखते हुए ऐसे बयान आगे भी देखने को मिल सकते हैं। राज्य की राजनीति में समाजवादी पार्टी और भाजपा गठबंधन के बीच पहले से ही तीखा संघर्ष जारी है। ऐसे में राजभर का यह हमला राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है।

फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी के कई नेताओं ने पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर खुलकर जवाब दे सकती है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अतीक अहमद, गोमती रिवरफ्रंट परियोजना और भ्रष्टाचार के आरोप लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। अब ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान ने इन मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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