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पिता के मर्डर केस में सभी आरोपी बरी, टूटे ओमराजे निंबालकर; राजनीति छोड़ने के दिए संकेत

पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद धाराशिव सांसद ओमराजे निंबालकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि पिता को न्याय दिलाने के लिए राजनीति में आए थे, लेकिन अब राजनीति छोड़ने का मन कर रहा है।

पिता के मर्डर केस में सभी आरोपी बरी, टूटे ओमराजे निंबालकर; राजनीति छोड़ने के दिए संकेत

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों धाराशिव से सांसद Omraje Nimbalkar का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके पिता Pawanraje Nimbalkar की हत्या से जुड़े करीब 20 साल पुराने मामले में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद उन्होंने राजनीति छोड़ने के संकेत दिए हैं।

हाल ही में आए अदालत के फैसले में एनसीपी के वरिष्ठ नेता Padamsinh Patil समेत सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। इस फैसले ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, बल्कि पीड़ित परिवार को भी गहरा झटका दिया है।

फैसले के बाद ओमराजे निंबालकर ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनका राजनीति में आने का मुख्य उद्देश्य अपने पिता को न्याय दिलाना था। उन्होंने कहा कि दो दशक बीत जाने के बावजूद अगर न्याय नहीं मिला, तो राजनीति में बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मेरा राजनीति छोड़ने का मन कर रहा है। मैं केवल अपने पिता को इंसाफ दिलाने के लिए राजनीति में आया था। जब वह उद्देश्य ही पूरा नहीं हुआ तो राजनीति में रहने का क्या मतलब है?”

ओमराजे ने अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सभी आरोपी बरी हो गए हैं, तो आखिर उनके पिता की हत्या किसने की। उनका यह सवाल अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

20 साल पुराना है मामला

पवनराजे निंबालकर हत्याकांड महाराष्ट्र के सबसे चर्चित राजनीतिक मामलों में गिना जाता है। वर्ष 2006 में उनकी और उनके ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान इस मामले को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देखा गया था और बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

सीबीआई ने अपनी जांच में कई लोगों को आरोपी बनाया था और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला विशेष अदालत में चला। करीब 15 साल तक सुनवाई चलने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

ओमराजे निंबालकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही कई मुद्दों को लेकर गरमाई हुई है। खासकर Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाले गुट और अन्य राजनीतिक दलों के बीच लगातार राजनीतिक उठापटक की खबरें सामने आ रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओमराजे का बयान केवल व्यक्तिगत पीड़ा का परिणाम नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया को लेकर उनकी निराशा को भी दर्शाता है। हालांकि उन्होंने अभी तक राजनीति छोड़ने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या ओमराजे निंबालकर वास्तव में सक्रिय राजनीति से दूरी बनाएंगे या फिर अपने समर्थकों और जनता के आग्रह पर राजनीतिक सफर जारी रखेंगे।

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