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शेयर बाजार की सुस्त शुरुआत, सेंसेक्स 140 अंक और निफ्टी 34 अंक टूटा

ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ खुला। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू बाजार की बुनियाद अभी भी मजबूत बनी हुई है

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कमजोर शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित और नकारात्मक संकेतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट फिलहाल सीमित है और भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेतों के कारण बाजार में लंबी अवधि का सकारात्मक रुख बरकरार रह सकता है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 140.44 अंकों की गिरावट के साथ 76,953.63 पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 34.05 अंकों की कमजोरी के साथ 24,068.85 के स्तर पर कारोबार शुरू करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार पर विदेशी संकेतों का असर साफ नजर आया।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से वैश्विक स्तर पर निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। अमेरिका, एशिया और यूरोप के प्रमुख बाजारों में अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, जो बाजार को समर्थन प्रदान कर रही हैं।

मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर बनी रही। अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव देखने को मिला। विशेष रूप से नैस्डैक इंडेक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे दुनिया भर के निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। अमेरिकी टेक सेक्टर में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों तक पहुंचा और इसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

सोमवार को अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 351.33 अंक यानी 1.32 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ था। वहीं एसएंडपी 500 इंडेक्स में 0.37 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। डॉव जोंस फ्यूचर्स में भी हल्की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर पड़ा।

एशियाई बाजारों की बात करें तो जापान का निक्केई 225 इंडेक्स करीब 1.51 फीसदी टूट गया। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी 1.20 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। हालांकि सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 0.23 फीसदी की बढ़त के साथ सकारात्मक संकेत देता नजर आया। कुल मिलाकर वैश्विक बाजारों से मिले संकेत मिश्रित रहे, लेकिन नकारात्मक पक्ष अधिक प्रभावी दिखाई दिया।

इस बीच भारतीय बाजार के लिए राहत की बात कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जाता है। कम तेल कीमतों से आयात बिल कम होता है और महंगाई पर दबाव घटता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 77.67 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 73.77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी आने से तेल बाजार में स्थिरता देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इसका फायदा भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों को मिलेगा।

सोने की कीमतों में भी मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 1.32 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। आमतौर पर जब निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं तो सोने की मांग कम हो जाती है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित और जोखिम वाले दोनों विकल्पों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बाजार विशेषज्ञ राजेश पालविया ने निफ्टी के लिए 24,000 के स्तर को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार जब तक निफ्टी 24,000 के ऊपर बना रहता है तब तक बाजार की संरचना सकारात्मक मानी जाएगी। यदि यह स्तर टूटता है तो 23,900 और 23,800 के स्तर अगले प्रमुख सपोर्ट के रूप में सामने आ सकते हैं।

दूसरी ओर ऊपर की तरफ 24,150 से 24,200 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर को मजबूती से पार करता है तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है और इंडेक्स 24,400 तक का स्तर छू सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर तकनीकी स्तरों के साथ-साथ वैश्विक संकेतों पर भी बनी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में आने वाली छोटी गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों को वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भले ही कमजोर रही हो, लेकिन घरेलू आर्थिक संकेतक अभी भी मजबूती का संकेत दे रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक परिस्थितियां और निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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