Indian Stock Market: शानदार रिकवरी के साथ 300 अंक उछला सेंसेक्स, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को दमदार वापसी की। सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक चढ़ा, जबकि निफ्टी 24,000 के करीब पहुंच गया। हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं।

Indian Stock Market: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए शानदार रिकवरी दर्ज की। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जिसके चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक की तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। बाजार की इस मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
Indian Stock Market में शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 76,576.14 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 76,503.60 पर बंद हुआ था। कुछ ही देर बाद खरीदारी तेज होने से सेंसेक्स बढ़कर 76,822.84 के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर की तुलना में 319.24 अंकों यानी 0.42 प्रतिशत की बढ़त थी। वहीं निफ्टी 23,928.95 पर खुला और बाद में 23,995.50 तक पहुंच गया, जो 113.45 अंकों यानी 0.48 प्रतिशत की तेजी को दर्शाता है।
बाजार की इस तेजी के पीछे बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में हुई खरीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और फार्मा सेक्टर में सीमित दबाव देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार की मजबूती के बावजूद निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी हुई है।
वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। हाल के घटनाक्रमों के बाद पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर करीब 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। ऊर्जा बाजार में आई इस तेजी ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बढ़ सकती है, जिसका सीधा प्रभाव महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के अनुसार, महंगे कच्चे तेल का फायदा ऑयल एंड गैस तथा अपस्ट्रीम ऊर्जा कंपनियों को मिल सकता है। दूसरी ओर सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स सेक्टर में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
पीएल कैपिटल के हेड एडवाइजरी विक्रम कसाट का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो घरेलू ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.567 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले कई सप्ताह का उच्च स्तर है। इसका असर वैश्विक निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
गुरुवार के कारोबार में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में इटर्नल, टाइटन, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, एसबीआई, रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टाटा स्टील के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। दूसरी ओर इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे आईटी शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी और फार्मा को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक समर्थन दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों में मजबूती बनी रही।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के प्रमुख सूचकांक लगभग 2 प्रतिशत तक चढ़ गए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों में खरीदारी बढ़ने से निवेशकों का उत्साह बढ़ा। हालांकि तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की तेजी को कुछ हद तक सीमित रखा।
अमेरिकी शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। डॉव जोन्स इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में बढ़त दर्ज की गई। यूरोपीय बाजारों में भी दबाव देखने को मिला और ब्रिटेन, जर्मनी तथा फ्रांस के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत वापसी जरूर की है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगी। निवेशकों को विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार सतर्कता के साथ निवेश रणनीति अपनानी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।



