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Mossad Pager Attack: एक कोड से फटे हजारों पेजर, UN में नेतन्याहू ने दिखाया वही Pager

2024 में हिज्बुल्लाह के संचार नेटवर्क को निशाना बनाने वाले pager blasts की गूंज एक बार फिर सामने आई, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने UN महासभा में pager दिखाकर पुराने हमले का जिक्र किया।

Mossad Pager Attack: एक कोड से फटे हजारों पेजर, UN में नेतन्याहू ने दिखाया वही Pager

नई दिल्ली। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष के दौरान सितंबर 2024 में हुए Mossad Pager Attack की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक pager अपने हाथ में दिखाया और हिज्बुल्लाह को 2024 के धमाकों की याद दिलाई। नेतन्याहू ने कहा कि हिज्बुल्लाह इन “beepers” को जरूर याद करता होगा।

नेतन्याहू का यह इशारा सितंबर 2024 में लेबनान में हुए उन धमाकों की ओर था, जिनमें हिज्बुल्लाह के इस्तेमाल वाले हजारों pagers एक साथ फट गए थे। अगले दिन weaponised walkie-talkies से जुड़े धमाके भी हुए थे। Reuters के अनुसार दोनों दिनों की घटनाओं में कुल 39 लोगों की मौत हुई और 3,400 से ज्यादा लोग घायल हुए।

कैसे शुरू हुआ था Pager Attack?

17 सितंबर 2024 को लेबनान के बेरूत और हिज्बुल्लाह के प्रभाव वाले दूसरे इलाकों में हजारों pagers अचानक फटने लगे। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक कई मामलों में pager पहले बीप हुआ और उसके बाद उसमें विस्फोट हुआ। इस वजह से कुछ लोगों ने संदेश देखने के लिए device को हाथ या चेहरे के पास किया और उसी समय विस्फोट हो गया।

उस समय हिज्बुल्लाह के लड़ाके मोबाइल फोन के बजाय pagers का इस्तेमाल कर रहे थे। इसका एक कारण यह बताया गया था कि pager के जरिए communication करने से मोबाइल फोन की तुलना में location tracking से बचने में मदद मिल सकती थी। Reuters ने हिज्बुल्लाह के संचालन से परिचित सूत्रों के हवाले से भी इस बात की जानकारी दी थी।

करीब 5 हजार Pagers में विस्फोटक लगाने की रिपोर्ट

इस घटना के बाद कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि हिज्बुल्लाह के लिए मंगाए गए लगभग 5,000 pagers में पहले से विस्फोटक छिपाए गए थे। Reuters ने उस समय रिपोर्ट किया था कि सुरक्षा सूत्रों और अन्य रिपोर्टों में इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad को इस ऑपरेशन के पीछे बताया गया था। हालांकि शुरुआती दिनों में इजरायल ने सार्वजनिक रूप से इसकी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी।

रिपोर्टों के मुताबिक इन devices को इस तरह तैयार किया गया था कि एक विशेष signal या message मिलने के बाद उनमें मौजूद विस्फोटक सक्रिय हो सकें। यही वजह थी कि घटना के दौरान बड़ी संख्या में pagers लगभग एक साथ फटने लगे।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऑपरेशन की तकनीकी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें और दावे सामने आए हैं। इसलिए “एक कोड भेजा गया और 3,000 pagers फट गए” जैसी जानकारी को मीडिया रिपोर्टों में सामने आए विवरण के रूप में देखना चाहिए, न कि सभी पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से स्थापित आधिकारिक तथ्य के रूप में।

अगले दिन Walkie-Talkie धमाके

Pager blasts के ठीक अगले दिन यानी 18 सितंबर 2024 को communication network से जुड़े दूसरे devices को भी निशाना बनाया गया। इस बार weaponised walkie-talkies में धमाके हुए। दोनों घटनाओं को मिलाकर मौतों और घायलों का आंकड़ा काफी बढ़ गया। Reuters ने बाद में कुल 39 मौतें और 3,400 से अधिक घायल होने की जानकारी दी।

इन हमलों ने हिज्बुल्लाह के communication network की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। संगठन के लिए यह केवल लोगों के घायल होने का मामला नहीं था, बल्कि उसके संचार तंत्र में संभावित घुसपैठ का भी संकेत था।

नेतन्याहू पर ऑपरेशन की जिम्मेदारी लेने की रिपोर्ट

बाद की रिपोर्टों में इजरायली मीडिया के हवाले से बताया गया कि नेतन्याहू ने एक cabinet meeting में pager operation को मंजूरी देने की बात स्वीकार की थी। Reuters ने नवंबर 2024 में रिपोर्ट किया था कि इजरायली मीडिया के अनुसार नेतन्याहू ने कहा कि कुछ वरिष्ठ रक्षा अधिकारी और राजनीतिक लोग इस operation के खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया।

हालांकि इस मामले में अलग-अलग समय पर अलग-अलग दावे सामने आए और इजरायल की ओर से शुरुआती चरण में सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई थी। इसलिए ऑपरेशन की पूरी planning, supply chain और technical execution को लेकर सामने आए सभी विवरणों को एक ही स्तर का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

Pager Attack के बाद बढ़ा तनाव

Pager और walkie-talkie explosions के बाद इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव और बढ़ गया। इसके बाद इजरायली सैन्य कार्रवाई तेज हुई और सितंबर 2024 के अंत में हिज्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की बेरूत में एक इजरायली हवाई हमले में मौत हुई। दक्षिणी लेबनान में भी सैन्य गतिविधियां बढ़ीं।

2024 की घटनाओं ने यह भी दिखाया कि आधुनिक युद्ध में communication technology कितनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील हो सकती है। जिस pager को tracking से बचने का अपेक्षाकृत सुरक्षित साधन माना जा रहा था, वही devices एक coordinated attack का माध्यम बन गए।

दो साल बाद UN में फिर Pager की चर्चा

अब सितंबर 2026 में नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से उसी घटना का प्रतीकात्मक रूप से जिक्र किया। भाषण के दौरान उन्होंने pager उठाकर हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का संदर्भ दिया और पूछा कि क्या उसे “beepers” याद हैं।

इस तरह 2024 का pager attack एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आ गया। नेतन्याहू के इस प्रदर्शन ने पुराने हमले को लेकर उन रिपोर्टों और दावों को भी फिर से सुर्खियों में ला दिया, जिनमें Mossad की भूमिका, pagers की supply chain और विस्फोटों को सक्रिय करने की तकनीक का उल्लेख किया गया था।

Mossad Pager Attack से जुड़ी पूरी कहानी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घटना के कई तकनीकी पहलुओं पर सार्वजनिक स्रोतों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। लेकिन 17-18 सितंबर 2024 को हजारों communication devices के विस्फोट और उसके बाद हिज्बुल्लाह-इजरायल संघर्ष के तेज होने की घटना व्यापक रूप से दर्ज है। अब दो साल बाद UN में pager दिखाकर नेतन्याहू ने उस ऑपरेशन को फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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