Breaking NewsCrimeEducationHeadlinesInvestigationJharkhand

द्वितीय JPSC सिविल सेवा परीक्षा: CBI रिपोर्ट के दो साल बाद भी ट्रायल शुरू नहीं, 60 आरोपियों पर गंभीर आरोप

JPSC की द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CBI की चार्जशीट फिर चर्चा में है। रिपोर्ट में अधिकारियों, बोर्ड सदस्यों और अभ्यर्थियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि मामले में अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो सका है।

JPSC Scam CBI Report: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और सीआईडी की कार्रवाई के बाद पुरानी CBI चार्जशीट भी चर्चा में आ गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच पूरी कर करीब दो वर्ष पहले अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी थी, लेकिन अब तक मामले में ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है। इससे वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे कई अभ्यर्थियों में निराशा का माहौल बना हुआ है।

JPSC Scam CBI Report के अनुसार, जांच एजेंसी ने करीब 60 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें तत्कालीन अध्यक्ष, आयोग के सदस्य, परीक्षा नियंत्रक, मूल्यांकनकर्ता, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य, आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोग और कई अभ्यर्थी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि परीक्षा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में नियमों की अनदेखी कर कथित रूप से कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

हाल के दिनों में सीआईडी ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद उनके आवास पर भी छापेमारी की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में भी अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी है।

इसी बीच द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी CBI रिपोर्ट फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। चार्जशीट में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सदस्यों और अधिकारियों पर परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अपने प्रभाव का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ मामलों में रिश्तेदारों और परिचितों को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए।

CBI की जांच में यह भी दावा किया गया कि इंटरव्यू बोर्ड, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, OMR शीट की प्रोसेसिंग और अंकों में बदलाव से जुड़े कई मामलों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले। जांच एजेंसी ने अदालत को कई दस्तावेज, रिकॉर्ड और गवाहों के बयान उपलब्ध कराए हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में ट्रायल के बाद ही होगा।

रिपोर्ट में कथित तौर पर यह भी कहा गया कि कुछ अभ्यर्थियों के अंकों में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। जांच एजेंसी ने दावा किया कि OMR शीट, इंटरव्यू मार्क्स और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कई विसंगतियां सामने आईं। इसके अलावा कुछ मूल्यांकनकर्ताओं और अधिकारियों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए गए।

इस पूरे मामले में कई पूर्व अधिकारी, आयोग के सदस्य, आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोग और दर्जनों अभ्यर्थी जांच के दायरे में आए। चार्जशीट में विभिन्न व्यक्तियों के खिलाफ अलग-अलग प्रकार के आरोप दर्ज किए गए हैं। हालांकि सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और अदालत में ट्रायल के बाद ही किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ट्रायल शुरू नहीं होने से ऐसे मामलों में न्याय मिलने में देरी होती है, जिससे प्रभावित अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ सकता है। वहीं पारदर्शी और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया प्रतियोगी परीक्षाओं में भरोसा कायम रखने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस बीच झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया को लेकर फिर बहस तेज हो गई है। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि पुराने मामलों का शीघ्र निपटारा होना चाहिए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

फिलहाल CBI की चार्जशीट अदालत के समक्ष है और मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि ट्रायल शुरू होता है तो दो दशक पुराने इस विवाद से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य न्यायालय में सामने आ सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: