Jharkhand Congress Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, रांची में प्रदर्शन
SIR और वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस का चुनाव आयोग पर सवाल, रांची में CEO कार्यालय का घेराव और राज्यभर में प्रदर्शन

Jharkhand Congress Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, रांची में प्रदर्शन
SIR और वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस का चुनाव आयोग पर सवाल, रांची में CEO कार्यालय का घेराव और राज्यभर में प्रदर्शन
झारखंड में Election Commission और SIR को लेकर राजनीतिक विवाद सोमवार को और तेज हो गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर झारखंड कांग्रेस ने राज्यभर में प्रदर्शन किया। रांची में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुराने विधानसभा परिसर के पास से विरोध मार्च निकाला, जो धुर्वा स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के कार्यालय तक पहुंचा। वहीं राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सवाल उठाए। पार्टी की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई गई। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों का जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए।
रांची में CEO कार्यालय तक पहुंचा विरोध मार्च
झारखंड कांग्रेस की ओर से सोमवार को रांची में विरोध मार्च निकाला गया। पार्टी कार्यकर्ता पुराने विधानसभा परिसर के आसपास एकत्र हुए और वहां से धुर्वा स्थित CEO कार्यालय की ओर बढ़े।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं। इस दौरान CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन राज्य के सभी जिला मुख्यालयों तक फैलाया गया था।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग की कार्यप्रणाली से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
CEC के इस्तीफे की मांग क्यों?
कांग्रेस का विरोध मुख्य रूप से SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े बदलावों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल हैं।
कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
इससे पहले भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने SIR को लेकर ‘Vote Chori’ जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, ‘वोट चोरी’ कांग्रेस और विपक्ष की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है, कोई स्थापित तथ्य नहीं।
14 आपत्तियों को लेकर भी विवाद
इस प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्टें भी हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को लेकर स्पष्ट किया है कि आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि किसी फैसले से पहले सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार होना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाता है।
वहीं, एक अलग रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली से संबंधित था और चुनाव आयोग की नीति से जुड़ा नहीं था।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की मौजूदगी
रांची में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए CEO कार्यालय के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा CEC का इस्तीफा और SIR को लेकर पार्टी की आपत्तियां रहीं।
देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। 25 सितंबर को कई राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। कुछ जगहों पर बैरिकेड तोड़ने की कोशिश और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आई थीं।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग की नीतियों से कुछ राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने SIR के जरिए मतदाता सूची में नामों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित नहीं होने चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
इन आरोपों पर ध्यान देना जरूरी है कि ये कांग्रेस के राजनीतिक दावे हैं। चुनाव आयोग की ओर से SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है।
चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया
चुनाव आयोग ने हालिया विवाद के बीच अपने फैसलों का बचाव किया है। आयोग के अनुसार SIR से संबंधित फैसले आयोग की सामूहिक और सर्वसम्मत प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि भविष्य में नई डिजिटल पहलों से जुड़े निर्णयों में अतिरिक्त चर्चा और जांच की व्यवस्था की जाएगी।
इससे साफ है कि फिलहाल कांग्रेस और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग है। कांग्रेस जहां प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं चुनाव आयोग अपने निर्णयों को संस्थागत और सर्वसम्मत प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।
अब आगे क्या?
झारखंड में कांग्रेस का यह प्रदर्शन SIR और चुनाव आयोग को लेकर चल रहे व्यापक राजनीतिक विवाद का हिस्सा है। राज्य में प्रदर्शन के बाद अब निगाह इस बात पर है कि चुनाव आयोग की ओर से झारखंड कांग्रेस की मांगों पर कोई अलग प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
वहीं, SIR को लेकर अदालतों और राजनीतिक दलों के स्तर पर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
फिलहाल झारखंड में कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया है। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है। ऐसे में इस पूरे विवाद में आगे आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और कानूनी developments महत्वपूर्ण रहेंगी।



