इंदौर नगर निगम अधिकारी पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, 80 लाख की आय में 2.53 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति, मकान, वाहन और अन्य निवेश सामने आए; आय से 216% अधिक संपत्ति होने का दावा।

Indore Lokayukta Raid: नगर निगम अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्रवाई
मध्य प्रदेश के इंदौर से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापेमारी की है। प्रारंभिक जांच में उनकी घोषित आय की तुलना में कहीं अधिक संपत्ति और खर्च सामने आने का दावा किया गया है।
लोकायुक्त के अनुसार, करीब 31 साल की सरकारी सेवा के दौरान अधिकारी की कुल आय लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई, जबकि अब तक की जांच में 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और खर्च का पता चला है। इससे करीब 1.73 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने की बात सामने आई है, जो आय की तुलना में 216 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है।
दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
लोकायुक्त की विशेष टीम ने इंदौर में स्थित दो अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। सुबह शुरू हुई इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य वित्तीय जानकारी की जांच की।
कार्रवाई के दौरान घरों और कार्यालय से बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। जांच अधिकारी इन दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति के वास्तविक स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
पत्नी के नाम करोड़ों के मकान
प्रारंभिक जांच में जो संपत्तियां सामने आई हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण पत्नी के नाम दर्ज दो मकान बताए जा रहे हैं। इनकी अनुमानित कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है।
इसके अलावा जांच में परिवार के नाम पर:
- 🚗 कई चारपहिया वाहन
- 🏠 अन्य अचल संपत्तियां
- 💰 निवेश और बचत से जुड़े रिकॉर्ड
- 📄 वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज सामने आए हैं।
लोकायुक्त अब यह जांच कर रहा है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और क्या इसके लिए वैध आय के स्रोत मौजूद थे।
आय और संपत्ति का बड़ा अंतर
जांच एजेंसियों के अनुसार:
| विवरण | राशि |
|---|---|
| अनुमानित कुल आय | ₹80 लाख |
| संपत्ति और खर्च | ₹2.53 करोड़ |
| कथित अतिरिक्त संपत्ति | ₹1.73 करोड़ |
यदि यह आंकड़े अंतिम जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला आय से अधिक संपत्ति के गंभीर मामलों में शामिल हो सकता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, निम्न पहलुओं की जांच की जा रही है:
- बैंक खातों में जमा राशि
- नकद लेनदेन
- संपत्ति खरीद के दस्तावेज
- रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के खातों से जुड़े रिकॉर्ड
- निवेश और बीमा पॉलिसियों की जानकारी
वित्तीय लेनदेन की होगी गहन पड़ताल
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से धन अर्जित तो नहीं किया गया। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और आयकर संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की जा सकती है।
नगर निगम में मचा हड़कंप
इंदौर नगर निगम में इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। नगर निगम में राजस्व विभाग को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह संपत्ति कर, वसूली और राजस्व से जुड़े मामलों को संभालता है।
ऐसे में इस स्तर के अधिकारी के खिलाफ हुई कार्रवाई को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
भ्रष्टाचार मामलों के जानकारों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में केवल संपत्ति मिलना पर्याप्त नहीं होता। जांच एजेंसियों को यह साबित करना होता है कि संबंधित अधिकारी के पास उस संपत्ति को अर्जित करने के लिए वैध आय का पर्याप्त स्रोत नहीं था।
इसी कारण लोकायुक्त द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड आगे की जांच में अहम भूमिका निभाएंगे।



