गोपालगंज के ‘हेलमेट मैन’ शाहिद इमाम सम्मानित, 12 साल से चला रहे सड़क सुरक्षा अभियान
स्वतंत्रता दिवस पर जिला प्रशासन ने किया सम्मानित, कमाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा सड़क सुरक्षा जागरूकता पर खर्च करते हैं शाहिद इमाम।

Gopalganj Helmet Man Shahid Imam: 12 साल से सड़क सुरक्षा का संदेश दे रहे शाहिद इमाम
बिहार के गोपालगंज में सड़क सुरक्षा को लेकर लंबे समय से जागरूकता अभियान चला रहे ‘हेलमेट मैन’ शाहिद इमाम को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया गया। शाहिद पिछले करीब 12 वर्षों से लोगों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
शाहिद इमाम की पहल इसलिए खास है क्योंकि वह सड़क सुरक्षा को केवल जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि अपनी कमाई का एक हिस्सा भी इसी काम में लगाते हैं। बताया जाता है कि वह अपनी आय का करीब 20 फीसदी हिस्सा सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर खर्च करते हैं।
उनका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि सड़क पर थोड़ी सी सावधानी कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है। हेलमेट पहनना, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना और वाहन चलाते समय जिम्मेदारी बरतना उनकी मुहिम का मुख्य हिस्सा है।
स्वतंत्रता दिवस पर जिला प्रशासन ने किया सम्मानित
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जिला प्रशासन की ओर से शाहिद इमाम को सम्मानित किया गया। उनके लंबे समय से चल रहे सड़क सुरक्षा अभियान और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया।
यह सम्मान शाहिद के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने किसी सरकारी पद या बड़े संस्थान के सहारे नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रयास से लोगों के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया।
उनका अभियान धीरे-धीरे लोगों के बीच पहचान बनाने लगा और आज उन्हें गोपालगंज में ‘हेलमेट मैन’ के नाम से जाना जाता है।
12 साल से लगातार चला रहे जागरूकता अभियान
शाहिद इमाम पिछले 12 वर्षों से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जगहों पर लोगों को हेलमेट के महत्व के बारे में बताया।
खासकर दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करना उनके अभियान का प्रमुख हिस्सा रहा है। उनका मानना है कि हेलमेट केवल पुलिस के चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में सिर को गंभीर चोट से बचाने के लिए जरूरी है।
वह लोगों से वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने, तेज गति से वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील भी करते हैं।
अपनी कमाई का 20 फीसदी सड़क सुरक्षा पर खर्च
शाहिद इमाम की मुहिम की सबसे खास बात यह है कि वह अपनी व्यक्तिगत आय का भी हिस्सा इस अभियान पर खर्च करते हैं।
जानकारी के मुताबिक, वह अपनी कमाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा रोड सेफ्टी जागरूकता पर खर्च करते हैं। इससे वह लोगों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाने और जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
उनका यह कदम बताता है कि सामाजिक बदलाव के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं। आम नागरिक भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
हेलमेट पहनने का देते हैं संदेश
भारत में सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। इसके बावजूद कई लोग हेलमेट पहनने में लापरवाही करते हैं।
शाहिद इमाम इसी लापरवाही को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका संदेश सीधा है—सड़क पर कुछ मिनट की असुविधा से बेहतर है कि जिंदगी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
वह लोगों को यह भी समझाने का प्रयास करते हैं कि हेलमेट केवल वाहन चलाने वाले व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि कई परिस्थितियों में पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी जरूरी होता है।
ट्रैफिक नियमों का पालन भी जरूरी
शाहिद का अभियान सिर्फ हेलमेट तक सीमित नहीं है। वह लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
लाल बत्ती पर रुकना, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन न चलाना, सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना और वाहन चलाते समय नशे से दूर रहना जैसे संदेश भी सड़क सुरक्षा जागरूकता का हिस्सा हैं।
उनका मानना है कि सड़क सुरक्षा तभी प्रभावी होगी, जब लोग नियमों को मजबूरी नहीं बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।
युवाओं को जागरूक करने पर जोर
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए युवाओं में जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है। बड़ी संख्या में युवा दोपहिया वाहन चलाते हैं और कई बार तेज गति या लापरवाही के कारण दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।
शाहिद इमाम युवाओं को विशेष रूप से सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करते हैं। उनका प्रयास है कि नई पीढ़ी सड़क सुरक्षा को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाए।
एक व्यक्ति की पहल बनी प्रेरणा
शाहिद इमाम की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी बदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति भी कर सकता है। उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता को अभियान में बदला और लगातार 12 वर्षों तक इसे जारी रखा।
उनका सम्मान यह संदेश भी देता है कि समाज के लिए काम करने वाले लोगों को पहचान और प्रोत्साहन मिलने से ऐसे प्रयासों को और गति मिल सकती है।
सम्मान के बाद और मजबूत हुआ संकल्प
स्वतंत्रता दिवस पर जिला प्रशासन से सम्मान मिलने के बाद शाहिद इमाम के अभियान को नई पहचान मिली है। इस तरह के सम्मान से सामाजिक कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और वे अपने प्रयासों को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं।
शाहिद की कोशिश है कि सड़क सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और लोग हेलमेट तथा ट्रैफिक नियमों को लेकर गंभीर हों।



