भरत तिवारी एनकाउंटर: स्मारक निर्माण पर प्रशासन ने लगाई रोक, जमीन विवाद बना वजह
आरा में भरत भूषण तिवारी के प्रस्तावित स्मारक पर प्रशासन की आपत्ति, सरकारी भूमि और निजी दावों के चलते निर्माण कार्य फिलहाल रुका।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक और नया मोड़ सामने आया है। एनकाउंटर के करीब 14 दिन बाद अब उनके प्रस्तावित स्मारक निर्माण को लेकर विवाद शुरू हो गया है। एक ओर परिजन और स्थानीय लोग भरत भूषण तिवारी की याद में स्मारक बनाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण शुरू किया गया है, वह बिहार सरकार की भूमि है और बिना आवश्यक अनुमति (एनओसी) के वहां किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता।
24 जून को आयोजित महापंचायत में जवईनियां गांव के लोगों ने भरत भूषण तिवारी की स्मृति में स्मारक बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रस्तावित स्थल पर निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई। जानकारी के अनुसार, कुछ ईंटें भी रख दी गई थीं और पहले चरण में 8×8 फीट का संगमरमर का चबूतरा बनाने की योजना थी। बाद में उसी स्थान पर भरत तिवारी की सफेद संगमरमर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया था।
हालांकि, निर्माण शुरू होते ही प्रशासन ने इस पर आपत्ति जता दी। शाहपुर अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि बिहार सरकार की है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के किसी भी तरह का निर्माण नियमों के विरुद्ध है और ऐसी स्थिति में प्रशासन कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब निजी जमीन के एक दावेदार ने भी निर्माण पर आपत्ति दर्ज करा दी। उनका कहना है कि यदि स्मारक बनाना है तो उसे सड़क के बीच बनाया जाए और सड़क का विस्तार उनकी निजी भूमि की ओर किया जाए। सरकारी और निजी दोनों स्तर पर उठी आपत्तियों के कारण फिलहाल स्मारक निर्माण का कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि स्मारक निर्माण का पूरा खर्च उत्तराखंड के संत स्वामी आनंद स्वरूप महाराज द्वारा उठाया जा रहा है। बताया गया कि स्वामी आनंद स्वरूप महाराज स्वयं गांव पहुंचे थे, परिजनों से मुलाकात की थी और प्रस्तावित स्मारक स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट भी रखी थी। यह वही स्थान बताया जा रहा है जहां भरत तिवारी को गोली लगी थी। उनकी मृत्यु के बाद स्थानीय लोगों ने उस जगह को ईंटों से घेर दिया और श्रद्धांजलि स्वरूप वहां की मिट्टी माथे पर लगाने की परंपरा भी शुरू हो गई।
परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि विवाद का समाधान हो जाता है तो स्मारक निर्माण दोबारा शुरू किया जाएगा। उनका मानना है कि यह स्थान भविष्य में भरत भूषण तिवारी की स्मृति से जुड़ा एक प्रमुख स्थल बन सकता है, जहां लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे।
इस बीच प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कई ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन इस मामले में जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखा रहा है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर अन्य कई स्मारक बने हुए हैं, लेकिन इस मामले में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन का यही रुख जारी रहा तो आंदोलन भी किया जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि मामला पूरी तरह भूमि विवाद और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। बिना आवश्यक अनुमति किसी भी निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। दूसरी ओर स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन सभी पक्षों से बातचीत कर ऐसा समाधान निकाले जिससे नियमों का भी पालन हो और स्मारक निर्माण का रास्ता भी साफ हो सके।
आरा में भरत भूषण तिवारी के स्मारक को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक और सामाजिक दोनों मुद्दों का रूप लेता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच होने वाली बातचीत तथा भूमि विवाद के समाधान पर सभी की नजर बनी हुई है।



