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Trump-Xi Weapons Controversy: चीन को हथियार बेचने के दावे पर अमेरिका में घमासान

अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू के बयान से मचा विवाद, व्हाइट हाउस और विदेश विभाग ने चीन को हथियार बेचने की किसी योजना से किया इनकार

Trump-Xi Weapons Controversy: चीन को हथियार बेचने के दावे पर अमेरिका में घमासान

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अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू के बयान से मचा विवाद, व्हाइट हाउस और विदेश विभाग ने चीन को हथियार बेचने की किसी योजना से किया इनकार

अमेरिका-चीन संबंधों में नया विवाद

Trump-Xi Weapons Controversy: अमेरिका और चीन के रिश्तों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड पर्ड्यू के एक बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अमेरिकी हथियार खरीदने की संभावना को लेकर सवाल किया था। पर्ड्यू ने फॉक्स न्यूज के एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप ने शी से पूछा था कि क्या चीन किसी समय अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा।

हालांकि, इस बयान के सामने आने के तुरंत बाद अमेरिकी प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका की चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या योजना मौजूद नहीं है।

डेविड पर्ड्यू ने क्या कहा?

अमेरिका के चीन में राजदूत डेविड पर्ड्यू ने 27 सितंबर को फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम में अमेरिका की ताइवान नीति और चीन के साथ हालिया बातचीत के बारे में चर्चा की। इसी दौरान उन्होंने कहा कि ट्रंप लगातार यह तर्क देते हैं कि अमेरिका दुनिया के दूसरे देशों को हथियार बेचता है और इसी संदर्भ में उन्होंने शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या चीन भी किसी समय अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेगा।

पर्ड्यू ने यह नहीं बताया कि ट्रंप ने यह सवाल वास्तव में कब पूछा था और शी जिनपिंग ने इसके जवाब में क्या कहा। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे चीन को हथियार बेचने की औपचारिक पेशकश या समझौता कहना सही नहीं होगा। यह विवरण फिलहाल अमेरिकी राजदूत के बयान पर आधारित है।

यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच सैन्य और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय से बनी हुई है। दोनों देशों के बीच ताइवान, सैन्य गतिविधियों, तकनीक और व्यापार जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं।

White House और State Department ने क्या कहा?

राजदूत के बयान के बाद अमेरिकी प्रशासन की ओर से स्थिति साफ करने की कोशिश की गई। व्हाइट हाउस ने The New York Times को बताया कि अमेरिका की चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है।

वहीं अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने भी कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने का कोई ऑफर या योजना नहीं है। इस तरह राजदूत के बयान और प्रशासन की आधिकारिक स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया है।

यानी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रंप और शी के बीच ऐसी बातचीत का दावा जरूर सामने आया है, लेकिन इसे किसी हथियार सौदे या चीन को हथियार बेचने की आधिकारिक नीति में बदलाव के रूप में पेश नहीं किया गया है।

Taiwan बना विवाद का अहम केंद्र

इस पूरे विवाद को समझने के लिए ताइवान का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका लंबे समय से ताइवान को सैन्य उपकरण और हथियार उपलब्ध कराता रहा है, जबकि चीन इन हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करता है।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियारों की बिक्री को अपनी संप्रभुता तथा सुरक्षा हितों के खिलाफ बताता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ताइवान के साथ अपने संबंधों को Taiwan Relations Act, अमेरिका-चीन के तीन संयुक्त कम्युनिके और अपनी लंबे समय से चली आ रही नीति के संदर्भ में देखता है।

हाल के दिनों में ताइवान के लिए प्रस्तावित करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को लेकर भी काफी चर्चा हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक इस पैकेज को फिलहाल रोका गया है। ट्रंप ने पहले इसे चीन के साथ बातचीत में एक महत्वपूर्ण मोल-भाव के साधन के तौर पर बताया था।

ऐसे समय में चीन को अमेरिकी हथियार खरीदने का सवाल उठाए जाने की बात सामने आना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।

अमेरिका पहले भी चीन को सैन्य सामान बेच चुका है

मौजूदा प्रतिबंधों को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि अमेरिका और चीन के बीच हथियारों का व्यापार पूरी तरह नया विषय क्यों नहीं है। इतिहास में दोनों देशों के संबंध आज की तुलना में अलग दौर से गुजर चुके हैं।

1980 के दशक में अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक सहयोग का एक दौर था, जब अमेरिका ने चीन को कुछ सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए थे। इनमें AN/TPQ-37 काउंटर-आर्टिलरी रडार और Mark-46 टॉरपीडो जैसे उपकरण शामिल थे। लेकिन बाद में दोनों देशों के संबंधों में बदलाव आया और चीन को अमेरिकी हथियारों की सरकारी बिक्री पर रोक लग गई।

Tiananmen Square के बाद बदले नियम

अमेरिका द्वारा चीन को हथियारों की बिक्री पर मौजूदा प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि 1989 के Tiananmen Square crackdown से जुड़ी है। जून 1989 की घटनाओं के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने चीन को सैन्य बिक्री और उच्चस्तरीय सैन्य संपर्कों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद हथियारों के निर्यात पर कई प्रतिबंध और नियंत्रण लागू हुए।

Congressional Research Service के अनुसार, चीन के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों में रक्षा संबंधी वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात पर रोक भी शामिल है। हालांकि कुछ मामलों में राष्ट्रपति के अधिकार के तहत विशेष छूट का प्रावधान मौजूद रहा है।

यही वजह है कि आज यदि चीन को अमेरिकी हथियार बेचने की कोई वास्तविक योजना होती, तो वह केवल सामान्य व्यापारिक फैसला नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी नीति और कानूनी प्रतिबंधों में बड़े बदलाव का विषय बनती।

क्या बदली है अमेरिका की China Policy?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमेरिका ने चीन को हथियार बेचने की अपनी नीति बदल दी है। एक तरफ अमेरिकी राजदूत ने ट्रंप द्वारा शी से अमेरिकी हथियार खरीदने के सवाल का उल्लेख किया है, वहीं दूसरी तरफ व्हाइट हाउस और विदेश विभाग ने किसी बिक्री योजना या प्रस्ताव से इनकार किया है।

राजदूत पर्ड्यू ने खुद भी ताइवान के मामले में अमेरिकी नीति में किसी बदलाव से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की Taiwan policy में बदलाव नहीं हुआ है और ताइवान के लिए अमेरिकी हथियारों की बिक्री पर चर्चा जारी है।

इसलिए फिलहाल मामला एक राजदूत के सार्वजनिक बयान और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बीच बने अंतर तक सीमित है। आने वाले दिनों में यदि व्हाइट हाउस या राष्ट्रपति ट्रंप इस बातचीत के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी देते हैं, तो इससे तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

 

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