PM Modi Diet: पीएम मोदी ने बताया फिटनेस का राज, बोले- मेरा कोई फिक्स डाइट सिस्टम नहीं, खिचड़ी भी खाता हूं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खानपान और फिटनेस को लेकर साझा की अपनी सोच, शाकाहारी भोजन से लेकर गहरी सांस और सूर्योदय देखने तक की बताई अहम बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने खानपान और फिटनेस को लेकर कई अहम बातें साझा की हैं। आमतौर पर लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता रहती है कि देश के प्रधानमंत्री अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच खुद को कैसे फिट रखते हैं। इसी सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने बताया था कि उनका कोई तय डाइट सिस्टम नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि जीवन के अलग-अलग दौर में उन्हें अलग-अलग परिवारों के साथ रहने का मौका मिला और वहां जो भोजन मिलता था, वही खाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि वे शाकाहारी हैं और जब कभी उन्हें खुद खाना बनाना पड़ता था तो कई बार साधारण भोजन के तौर पर खिचड़ी बना लेते थे।
पीएम मोदी ने ये बातें Pariksha Pe Charcha 2026 के दौरान छात्रों के साथ बातचीत में कही थीं। एक छात्र ने उनसे उनकी डाइट और फिटनेस के बारे में सवाल पूछा था। जवाब में प्रधानमंत्री ने किसी खास या महंगी डाइट को फिटनेस का फॉर्मूला बताने के बजाय खानपान को व्यक्ति की पसंद और जीवनशैली से जोड़कर समझाया।
कोई तय डाइट सिस्टम नहीं
पीएम मोदी ने साफ कहा कि उनका कोई निश्चित डाइट सिस्टम नहीं रहा। उन्होंने अपने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए बताया कि अलग-अलग परिवारों के साथ रहने के दौरान वहां जो खाना मिलता था, वही खाते थे।
उन्होंने बताया कि उनकी एक निश्चित बात यह थी कि वे शाकाहारी हैं। यानी उनके भोजन में मांसाहारी चीजें शामिल नहीं होती थीं। कई बार जब उन्हें खुद खाना बनाना पड़ता था तो वे साधारण भोजन तैयार करते थे और खिचड़ी भी बनाकर खाते थे।
इस बात से पीएम मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति के लिए एक जैसा डाइट चार्ट जरूरी नहीं है। खानपान व्यक्ति की जरूरत, पसंद और जीवनशैली के अनुसार होना चाहिए।
डाइट को दवा की तरह न लें
पीएम मोदी ने डाइट को लेकर एक दिलचस्प बात कही। उनका कहना था कि डाइट ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसे व्यक्ति किसी दवा की तरह मजबूरी में ले। इसके बजाय खानपान को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि वह सिर्फ पेट भरने के लिए खा रहा है या भोजन से संतुष्टि भी चाहता है। उनके अनुसार खाने को लेकर जागरूकता जरूरी है, लेकिन इसे इतना कठिन नियम नहीं बना देना चाहिए कि उसे लंबे समय तक अपनाना मुश्किल हो जाए।
यह विचार उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है जो फिटनेस के नाम पर अचानक बहुत सख्त डाइट शुरू कर देते हैं और कुछ समय बाद उसे छोड़ देते हैं। पीएम मोदी की बात का जोर लगातार अपनाई जा सकने वाली जीवनशैली पर था।
पेट भरने से ज्यादा शरीर पर ध्यान
प्रधानमंत्री ने खाने और सांस लेने की तुलना करते हुए भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर तब तक खाना खाते रहते हैं जब तक उनका पेट भर न जाए, लेकिन सांस लेने के दौरान शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन देने पर उतना ध्यान नहीं देते।
उन्होंने लोगों को दिन में जब भी मौका मिले, गहरी सांस लेने की आदत डालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गहरी सांस लेकर कुछ समय रोकने और फिर धीरे-धीरे छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा सकता है।
पीएम मोदी ने इस दौरान शरीर को प्राथमिकता देने की बात भी कही। उनका कहना था कि लोग अपनी जिंदगी में कई तरह के कामों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन कई बार अपने शरीर को सबसे आखिरी प्राथमिकता दे देते हैं।
सूर्योदय देखने की भी दी सलाह
पीएम मोदी ने छात्रों से बातचीत के दौरान सूर्योदय देखने को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने की बात कही। उन्होंने इसे शरीर में ताजगी और ऊर्जा से जोड़ा और कहा कि इसे आदत बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
उनकी बात का मूल संदेश यह था कि दिन की शुरुआत प्रकृति के साथ जुड़कर और शरीर पर ध्यान देकर करने से व्यक्ति अपनी दिनचर्या को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के लिए सूर्योदय देखना या कोई विशेष फिटनेस आदत अपनाना व्यक्तिगत पसंद और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसे सभी लोगों के लिए किसी चिकित्सकीय उपचार या गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिटनेस में सिर्फ डाइट ही नहीं
पीएम मोदी की फिटनेस को लेकर हाल के वर्षों में योग, पैदल चलने, सांस से जुड़े अभ्यास और ध्यान जैसी आदतों की भी चर्चा होती रही है। सितंबर 2026 में उनके 76वें जन्मदिन के मौके पर प्रकाशित कई रिपोर्ट्स में उनके लंबे समय से बताए गए योग, वॉकिंग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और खानपान से जुड़े अभ्यासों का उल्लेख किया गया।
हालांकि, पीएम मोदी ने खुद जिस बातचीत में डाइट के बारे में जानकारी दी थी, उसमें किसी एक खास डाइट को सभी के लिए जरूरी नहीं बताया। उनका जोर अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार भोजन करने तथा शरीर को पर्याप्त महत्व देने पर था।
स्वस्थ शरीर को दी प्राथमिकता
पीएम मोदी की बातों में एक प्रमुख संदेश यह रहा कि व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने शरीर का भी ध्यान रखना चाहिए। उनका कहना था कि लोग अक्सर अपनी दिनचर्या में कई कामों को प्राथमिकता देते हैं और शरीर को पीछे कर देते हैं।
उनके मुताबिक, शरीर को प्राथमिकता देने से व्यक्ति अपनी बाकी जिम्मेदारियों को भी बेहतर तरीके से निभा सकता है। यही वजह है कि उन्होंने खानपान के साथ-साथ सांस लेने और दिन की शुरुआत जैसी छोटी-छोटी आदतों पर भी ध्यान देने की बात कही।
पीएम मोदी की डाइट से क्या सीख मिलती है?
पीएम मोदी की बताई बातों से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि खिचड़ी या कोई एक खास भोजन ही फिटनेस का कारण है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि भोजन व्यक्ति की जीवनशैली और पसंद के अनुकूल होना चाहिए।
फिटनेस के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त आराम जैसे सामान्य स्वास्थ्य सिद्धांतों का महत्व बना रहता है। किसी व्यक्ति की डाइट या फिटनेस रूटीन को अपनाने से पहले उसकी व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
पीएम मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका कोई फिक्स डाइट सिस्टम नहीं रहा। शाकाहारी भोजन, साधारण खाना, जरूरत के मुताबिक डाइट और शरीर को प्राथमिकता देना उनकी बताई सोच के प्रमुख हिस्से रहे हैं। साथ ही उन्होंने गहरी सांस लेने और सूर्योदय देखने जैसी आदतों पर भी जोर दिया।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खानपान और फिटनेस से जुड़ी बातों का फोकस किसी खास डाइट चार्ट पर नहीं, बल्कि ऐसी जीवनशैली पर है जिसे लंबे समय तक अपनाया जा सके।


