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Patna Protest: जेपी गोलंबर से डाकबंगला तक प्रदर्शन, कई हिरासत में

पटना में दो अलग-अलग आंदोलनों से बढ़ी हलचल, किसान-मजदूर संगठनों और छात्रों का प्रदर्शन; बैरिकेडिंग तोड़ने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया

Patna Protest: जेपी गोलंबर से डाकबंगला तक प्रदर्शन, कई हिरासत में

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पटना में दो अलग-अलग आंदोलनों से बढ़ी हलचल, किसान-मजदूर संगठनों और छात्रों का प्रदर्शन; बैरिकेडिंग तोड़ने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया

पटना में आज क्या हुआ?

Patna Protest: बिहार की राजधानी पटना में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को अलग-अलग मांगों को लेकर दो बड़े आंदोलनों के कारण शहर में काफी हलचल देखने को मिली। एक ओर किसान, मजदूर, छात्र और विभिन्न वामपंथी संगठनों से जुड़े लोग गांधी मैदान से लोकभवन/राजभवन मार्च के लिए निकले, वहीं दूसरी ओर बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BUHS) के छात्रों ने अपनी शैक्षणिक मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। दोनों आंदोलनों को देखते हुए पटना के कई प्रमुख इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई।

गांधी मैदान से निकले आक्रोश मार्च में किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, ट्रेड यूनियन, AISF, AIYF और अन्य जनसंगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बेरोजगारी, बाढ़-सूखे की समस्या, मजदूरों के रोजगार और कई अन्य मुद्दों को उठाया। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर की ओर बढ़े, जहां पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने के दौरान बैरिकेडिंग तोड़ दी गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनी।

जेपी गोलंबर पर टूटी बैरिकेडिंग

प्रदर्शन को देखते हुए जेपी गोलंबर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 200 पुलिसकर्मियों को मौके पर लगाया गया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते हुए डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की भी खबर सामने आई।

इसके बाद डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और बाद में पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए भीड़ को पीछे हटाया। विभिन्न रिपोर्टों में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें महिला और पुरुष दोनों प्रदर्शनकारी शामिल बताए गए हैं।

किन मुद्दों को लेकर हो रहा था प्रदर्शन?

इस आंदोलन में शामिल संगठनों की मांगें कई अलग-अलग मुद्दों से जुड़ी थीं। वाम दलों और मजदूर संगठनों की ओर से बाढ़ और सूखे की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई और बेरोजगारी को लेकर भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बिहार राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय के अनुसार, प्रदर्शन में बाढ़-सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, भूमि अधिग्रहण, रोजगार और महिलाओं तथा बच्चियों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए गए। इन बयानों को संबंधित संगठन की मांग और राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारे लगाए गए और उनके पद से हटाए जाने की मांग उठी। यह मांग वर्तमान राजनीतिक विवाद के संदर्भ में प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से रखी गई थी।

दूसरा आंदोलन छात्रों का

पटना में इसी दौरान दूसरा प्रमुख प्रदर्शन बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के छात्रों की ओर से किया गया। छात्रों की प्रमुख मांग स्थायी कुलपति की नियुक्ति और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र को नियमित करने से जुड़ी थी। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश की।

इस तरह सोमवार को पटना में एक तरफ किसान-मजदूर और विभिन्न जनसंगठनों का बड़ा मार्च था, तो दूसरी तरफ BUHS छात्रों का आंदोलन। दोनों प्रदर्शनों के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और यातायात भी प्रभावित हुआ।

डाकबंगला पर पुलिस की सख्ती

जेपी गोलंबर से आगे बढ़ने के बाद प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे तक पहुंचे। यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेड और सुरक्षा घेरा तैयार किया था। जब भीड़ आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस तनातनी के कारण डाकबंगला और आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण रही। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी भी बताई गई है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रदर्शनकारियों की ओर से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत हैं। दूसरी ओर प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने पर है। प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनके संबंध में आगे प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

पटना में एक ही दिन किसान-मजदूर संगठनों और छात्रों के अलग-अलग आंदोलनों से यह साफ है कि शहर में कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है। आने वाले समय में सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभाग इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल पुलिस प्रमुख इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 

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