Haryana Farmer Protest: धान खरीद में देरी पर भड़के किसान, शाहाबाद में NH-44 जाम; पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के नेतृत्व में किसानों का प्रदर्शन उग्र, प्रशासन से करीब डेढ़ घंटे की बातचीत बेनतीजा; वाटर कैनन और आंसू गैस के बाद हाईवे पर तनाव

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन मंगलवार को उग्र हो गया। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान शहीद ऊधम सिंह स्मारक के पास जुटे और सरकार से धान की खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की। किसानों का कहना है कि फसल तैयार हो चुकी है और मंडियों में धान पहुंचने लगा है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान किसान दिल्ली-चंडीगढ़ जीटी रोड यानी राष्ट्रीय राजमार्ग-44 की ओर बढ़े। पुलिस ने किसानों को हाईवे तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने लगे। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े।
किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत बेनतीजा
प्रदर्शन शुरू होने से पहले किसान नेताओं और प्रशासन के बीच बातचीत का प्रयास भी किया गया। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी और कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। हालांकि बैठक में किसानों की मांग पर तत्काल सहमति नहीं बन सकी।
बातचीत विफल होने के बाद किसानों ने हाईवे की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि जब मंडियों में फसल पहुंच रही है तो सरकारी खरीद में देरी से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
क्यों नाराज हैं किसान?
किसानों की मुख्य मांग धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की है। किसान संगठनों का कहना है कि इस साल कई इलाकों में धान की फसल समय से पहले तैयार हो गई है और मंडियों में आवक शुरू हो चुकी है।
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने पहले 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग की थी। बाद में किसानों की ओर से 22 सितंबर तक खरीद शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन 22 सितंबर तक भी सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण संगठन ने शाहाबाद में हाईवे जाम करने का ऐलान किया था।
किसानों का तर्क है कि यदि सरकारी एजेंसियां समय पर खरीद शुरू नहीं करती हैं तो मंडियों में पहुंच चुकी फसल को बेचने में उन्हें दिक्कत हो सकती है। किसान संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि सरकारी खरीद के अभाव में कुछ किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से कम कीमत पर अपनी फसल बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने केंद्र से की थी खरीद जल्द शुरू करने की मांग
इस विवाद के बीच हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार से धान की सरकारी खरीद निर्धारित समय से पहले शुरू करने का अनुरोध किया था। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने धान की आवक शुरू होने और किसानों की परेशानी का हवाला देते हुए खरीद को 1 अक्टूबर की निर्धारित शुरुआत से पहले 20 सितंबर से शुरू करने का अनुरोध किया था।
हालांकि केंद्र की मौजूदा खरीद अवधि 1 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 निर्धारित है। इसी वजह से खरीद की शुरुआत को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद बना हुआ है।
शाहाबाद में पुलिस की भारी तैनाती
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए शाहाबाद में जीटी रोड और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए किसानों को राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की।
जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़े तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान कुछ समय के लिए इलाके में तनाव और अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।
एनएच-44 पर प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। बाद में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने की जानकारी सामने आई। स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल भी किया गया।
चढ़ूनी ने हिरासत में लिए जाने का लगाया आरोप
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई किसानों को हिरासत में लिया गया। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ूनी ने पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल की पुष्टि करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया है।
हालांकि पुलिस और किसान पक्ष के दावों में अंतर हो सकता है, इसलिए हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और कार्रवाई से जुड़ी अन्य जानकारी के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार महत्वपूर्ण रहेगा।
‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल भी चर्चा में
धान खरीद के विवाद के बीच किसानों के पंजीकरण से जुड़ा ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल भी चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, लंबित पंजीकरण वाले किसानों को मौका देने के लिए पोर्टल को दोबारा खोला गया है।
किसान संगठनों का कहना है कि केवल पंजीकरण शुरू करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि पंजीकरण, फसल सत्यापन और मंडी में सरकारी खरीद की प्रक्रिया के बीच बेहतर तालमेल होना जरूरी है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबे समय तक मंडियों में इंतजार न करना पड़े।
अब आगे क्या होगा?
शाहाबाद में किसानों का आंदोलन फिलहाल धान की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग पर केंद्रित है। किसान संगठनों ने संकेत दिया है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जा सकता है।
वहीं प्रशासन के सामने चुनौती किसानों की मांग और सरकारी खरीद की प्रक्रिया के बीच समाधान निकालने की है। राज्य सरकार पहले ही खरीद जल्द शुरू करने के लिए केंद्र से अनुरोध कर चुकी है, जबकि केंद्र की निर्धारित खरीद अवधि 1 अक्टूबर से शुरू होती है।
फिलहाल शाहाबाद में हुए प्रदर्शन ने धान खरीद को लेकर किसानों की नाराजगी को सामने ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या धान खरीद की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहता है।


