Uncategorized

Jharkhand Mineral Production: देश के खनिज उत्पादन में झारखंड का 3.6% योगदान, लौह अयस्क-बॉक्साइट में खास हिस्सेदारी

नीति आयोग की रिपोर्ट में सामने आया आंकड़ा, 2024-25 में झारखंड का कुल खनिज उत्पादन में 3.6% योगदान; बॉक्साइट में 7.5% और लौह अयस्क में 6.6% हिस्सेदारी

झारखंड को देश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज संपदा वाले राज्यों में गिना जाता है। राज्य की पहचान लंबे समय से कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा और दूसरे खनिजों के बड़े भंडार के कारण रही है। अब खनिज उत्पादन से जुड़े ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर झारखंड की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने रखा है।

नीति आयोग की सितंबर 2026 में प्रकाशित ट्रेड वॉच क्वार्टरली रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में देश के कुल खनिज उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में झारखंड को खनिज उत्पादन और संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल किया गया है।

सबसे खास बात यह है कि झारखंड का योगदान सिर्फ कुल खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं है। राज्य ने कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के राष्ट्रीय उत्पादन में भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी दर्ज की है। आंकड़ों के मुताबिक, बॉक्साइट के राष्ट्रीय उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत और लौह अयस्क में 6.6 प्रतिशत रही। इसके अलावा तांबा अयस्क में राज्य का योगदान 3.2 प्रतिशत और ग्रेफाइट में 0.4 प्रतिशत बताया गया है।

झारखंड की खनिज संपदा क्यों है खास?

झारखंड का नाम देश के खनिज मानचित्र पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य के खान एवं भूविज्ञान विभाग के अनुसार, झारखंड के पास भारत के कुल खनिज संसाधनों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा है। राज्य कोयला भंडार के मामले में पहले, लौह अयस्क भंडार में दूसरे और तांबा अयस्क भंडार में तीसरे स्थान पर बताया गया है। बॉक्साइट भंडार के मामले में भी झारखंड महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है।

राज्य में कोयले के अलावा लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा, ग्रेफाइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, मैंगनीज, अभ्रक, यूरेनियम और कई अन्य खनिज उपलब्ध हैं। यही वजह है कि झारखंड में खनन और खनिज आधारित उद्योगों का राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है।

लौह अयस्क में 6.6% हिस्सेदारी

लौह अयस्क स्टील उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से एक है। झारखंड में लौह अयस्क के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं और राज्य का देश के लौह अयस्क उत्पादन में भी उल्लेखनीय योगदान है।

नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में राष्ट्रीय लौह अयस्क उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत रही। इसका सीधा संबंध राज्य में मौजूद खनिज संसाधनों और उनसे जुड़े खनन एवं औद्योगिक ढांचे से है।

लौह अयस्क की उपलब्धता ने झारखंड को स्टील और मेटल आधारित उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण बनाया है। राज्य में खनिज आधारित औद्योगिक गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा इसी संसाधन आधार से जुड़ा हुआ है।

बॉक्साइट में झारखंड की 7.5% हिस्सेदारी

लौह अयस्क के अलावा बॉक्साइट भी झारखंड के लिए महत्वपूर्ण खनिज है। बॉक्साइट एल्युमिनियम उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है और इसका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण समेत कई क्षेत्रों में होता है।

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में देश के कुल बॉक्साइट उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा बताता है कि बॉक्साइट उत्पादन के मामले में भी राज्य की भूमिका महत्वपूर्ण है।

तांबा और ग्रेफाइट में भी योगदान

झारखंड की खनिज पहचान केवल लौह अयस्क और बॉक्साइट तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के तांबा अयस्क उत्पादन में राज्य का योगदान 3.2 प्रतिशत रहा, जबकि ग्रेफाइट में इसकी हिस्सेदारी 0.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

तांबा बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण धातु है। वहीं ग्रेफाइट का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में इन खनिजों में झारखंड की मौजूदगी राज्य की विविध खनिज क्षमता को दर्शाती है।

देश के खनिज उत्पादन में पांच राज्यों का दबदबा

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का खनिज उत्पादन कुछ प्रमुख राज्यों में काफी अधिक केंद्रित है। ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और महाराष्ट्र मिलकर देश के कुल खनिज उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं। ओडिशा अकेले राष्ट्रीय खनिज उत्पादन का करीब दो-पांचवां हिस्सा योगदान करता है।

ऐसे में झारखंड का 3.6 प्रतिशत योगदान राज्य की खनिज अर्थव्यवस्था की अहमियत को दिखाता है। राज्य के पास मौजूद बड़े संसाधन इसे खनन, उद्योग और खनिज आधारित कारोबार के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं।

खनिज संपदा के साथ पर्यावरण की चुनौती

झारखंड के लिए बड़ी खनिज संपदा आर्थिक अवसर भी है और चुनौती भी। खनन से रोजगार, उद्योग, परिवहन और सरकारी राजस्व को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

खनन गतिविधियों के दौरान भूमि, जंगल, जल स्रोत और स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। ऐसे में भविष्य में खनिज उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ और जिम्मेदार खनन पर जोर देना महत्वपूर्ण होगा।

नीति आयोग की रिपोर्ट भी भारत में खनिज क्षेत्र के संदर्भ में प्रसंस्करण क्षमता, मूल्यवर्धन, लॉजिस्टिक्स और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जोर देती है।

खनिज उत्पादन से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर जोर

झारखंड के लिए आने वाले समय में केवल कच्चे खनिजों के उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय उनके प्रसंस्करण और उच्च मूल्य वाले उत्पादों की दिशा में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण हो सकता है।

अगर राज्य में खनिज आधारित उद्योगों और प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार होता है, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही इससे खनिज संसाधनों से अधिक आर्थिक मूल्य प्राप्त करने की संभावना भी बन सकती है।

झारखंड की खनिज पहचान फिर चर्चा में

कुल मिलाकर, 2024-25 के आंकड़ों में देश के कुल खनिज उत्पादन में 3.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ झारखंड की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। वहीं बॉक्साइट में 7.5 प्रतिशत, लौह अयस्क में 6.6 प्रतिशत और तांबा अयस्क में 3.2 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य की विविध खनिज क्षमता को सामने लाती है।

झारखंड की खनिज संपदा लंबे समय से राज्य की पहचान और औद्योगिक गतिविधियों का आधार रही है। अब चुनौती यह है कि इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के संतुलन के साथ किया जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: