Brahmaputra River China Project: ब्रह्मपुत्र पर चीन के विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से बढ़ी चिंता, भूकंप और बाढ़ का खतरा!
हिमालय के संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में बन रहा प्रोजेक्ट, विशेषज्ञों ने बांध और आसपास के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के निर्माणाधीन विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यारलुंग त्सांगपो के नाम से जानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहा यह प्रोजेक्ट हिमालय के संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में विशेषज्ञों की चिंता केवल परियोजना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूकंप, भूस्खलन और नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट को लेकर सामने आई चिंताओं के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक और भूगर्भीय परिस्थितियां काफी जटिल हैं। अगर इस क्षेत्र में बड़ा भूकंप या अन्य भूगर्भीय हलचल होती है, तो बांध और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि परियोजना की सुरक्षा और डिजाइन को लेकर विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।
हिमालय के भूकंपीय क्षेत्र में बन रहा प्रोजेक्ट
ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में होता है और आगे चलकर यह नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से होते हुए बांग्लादेश तक पहुंचती है। इसी वजह से नदी पर बनने वाला कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट केवल चीन तक सीमित मामला नहीं माना जा सकता।
परियोजना का क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में किसी बड़े भूकंप की स्थिति में बांध की संरचना, जलाशय और आसपास के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में केवल बांध की मजबूती ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसके आसपास की पहाड़ियों, ढलानों और जमीन की स्थिरता भी बेहद अहम होती है।
जमीन की कमजोर संरचना को लेकर चिंता
सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के प्रोफेसर एमेरिटस ब्रह्मा चेल्लानी ने एक लेख में चीन के वैज्ञानिकों के शोध का हवाला देते हुए परियोजना क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति पर चिंता जताई है। शोध में जमीन की कमजोर संरचना और भूस्खलन जैसे संभावित खतरों का उल्लेख किया गया है।
अगर किसी बड़े प्रोजेक्ट के आसपास की जमीन और पहाड़ी ढलान अस्थिर हों, तो भारी बारिश, भूकंप या भूगर्भीय हलचल के दौरान जोखिम बढ़ सकता है। इसी कारण वैज्ञानिकों ने जलाशय के आसपास की ढलानों को मजबूत करने और परियोजना के कुछ हिस्सों को बेहतर तरीके से डिजाइन करने की सलाह दी है।
यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमालय दुनिया के सबसे सक्रिय और जटिल पर्वतीय क्षेत्रों में से एक है। यहां प्राकृतिक परिस्थितियों में होने वाला बदलाव बड़े स्तर पर असर डाल सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है ब्रह्मपुत्र?
ब्रह्मपुत्र नदी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर पूर्वोत्तर भारत में इस नदी का सीधा संबंध खेती, मछली पालन और लाखों लोगों की आजीविका से है। नदी के पानी और गाद का प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में नदी पर विशाल बांध बनने से पानी के बहाव और गाद के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव की आशंका जताई जा रही है। अगर नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ कृषि और स्थानीय आजीविका पर भी पड़ सकता है।
ब्रह्मपुत्र केवल एक नदी नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस नदी पर होने वाली किसी भी बड़ी परियोजना को लेकर भारत की चिंताएं स्वाभाविक हैं।
भूकंप की स्थिति में बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा
विशेषज्ञों की एक बड़ी चिंता संभावित भूकंप से जुड़ी है। अगर किसी बड़े भूकंप के कारण बांध या उससे जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसी तरह अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की स्थिति में नदी के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
इसका असर केवल भारत तक सीमित नहीं रह सकता। भारत के साथ-साथ बांग्लादेश के निचले इलाकों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसलिए परियोजना से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर नीचे की ओर बसे देशों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई जा रही है।
पर्यावरण पर भी पड़ सकता है असर
बड़े बांध और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। पानी के प्रवाह के साथ नदी में गाद का आना-जाना भी प्रभावित हो सकता है। इसका असर नदी के पर्यावरण और उससे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने की आशंका रहती है।
ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण नदी के मामले में यह मुद्दा और संवेदनशील हो जाता है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप में होने वाला बदलाव लंबे समय में खेती, मछली पालन और स्थानीय समुदायों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है।
चीन से पारदर्शिता की अपील
रिपोर्ट में चीन से इस परियोजना को लेकर अधिक पारदर्शिता बरतने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना के संभावित प्रभावों और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को लेकर नीचे की ओर बसे देशों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
भारत और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए नदी के पानी का प्रवाह सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी बड़े बदलाव से पहले संभावित प्रभावों का आकलन और संबंधित देशों के साथ जानकारी साझा करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
आने वाले समय में बढ़ सकती है निगरानी
ब्रह्मपुत्र पर चीन के इस विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर आने वाले समय में निगरानी और चर्चा बढ़ने की संभावना है। एक तरफ चीन के लिए यह ऊर्जा उत्पादन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी परियोजना है, वहीं दूसरी तरफ भारत और बांग्लादेश के लिए नदी के प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि भूकंपीय गतिविधियों और संभावित भूगर्भीय हलचल की स्थिति में परियोजना कितनी सुरक्षित रहेगी। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नदी के पानी और गाद के प्राकृतिक प्रवाह पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
कुल मिलाकर, तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहा चीन का विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट केवल ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरण, भूगर्भीय सुरक्षा और क्षेत्रीय जल संसाधनों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया है। विशेषज्ञों की चिंताओं के बीच अब निगाह इस बात पर है कि चीन परियोजना को लेकर कितनी पारदर्शिता बरतता है और भारत व बांग्लादेश जैसे नीचे की ओर बसे देशों की चिंताओं को किस तरह संबोधित किया जाता है।


