Jharkhand Coal Scam: झारखंड में अवैध कोयला कारोबार पर ED की बड़ी कार्रवाई, धनबाद समेत 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में धनबाद सहित कई जिलों में एक साथ छापेमारी की, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जारी।

धनबाद। झारखंड में अवैध कोयला कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के कई जिलों में एक साथ 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। धनबाद, बोकारो और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे इस सर्च ऑपरेशन को अवैध कोयला खनन से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की अलग-अलग टीमें सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर पहुंचीं और दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा डिजिटल डेटा की जांच शुरू की। एजेंसी को संदेह है कि अवैध कोयला खनन के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध कमाई की गई और बाद में इस रकम को फर्जी कंपनियों, संपत्तियों और अन्य माध्यमों से वैध दिखाने की कोशिश की गई।
धनबाद में कई ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन
जानकारी के मुताबिक धनबाद में छह से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की गई। जिन लोगों और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की जांच की जा रही है, उनमें अनिल गोयल, गणेश यादव, पप्पू मंडल, हरेंद्र चौहान, अनूप चौहान, इम्तियाज अली, रोहित यादव, राजेश यादव, गुड्डू यादव और लाल बाबू सिंह के सहयोगियों के नाम सामने आए हैं।
छापेमारी के दौरान कई परिसरों में लंबे समय तक दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की प्रक्रिया चली। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई ताकि जांच में किसी प्रकार की बाधा न आए।
रणजीत सिंह के घर पहुंचने के लिए सीढ़ी का इस्तेमाल
इस कार्रवाई का सबसे चर्चित पहलू रणजीत सिंह के आवास पर हुई जांच रही। बताया जा रहा है कि ईडी की टीम को घर में प्रवेश करने के लिए सीढ़ी लगाकर अंदर जाना पड़ा। इस घटना की चर्चा पूरे इलाके में होती रही और बड़ी संख्या में लोग आसपास जमा हो गए। हालांकि एजेंसी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क की जांच
ईडी फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध कोयला खनन से अर्जित रकम किन-किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंची। जांच के दौरान एजेंसी कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा जुटा रही है। माना जा रहा है कि डिजिटल रिकॉर्ड से लेन-देन, बैंक खातों और संभावित निवेश नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि अवैध खनन से जुड़ी राशि को संपत्ति खरीद, फर्जी बिलिंग, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क या अन्य कारोबारी गतिविधियों के माध्यम से खपाया गया या नहीं।
झारखंड में पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाइयां
झारखंड में अवैध कोयला कारोबार लंबे समय से जांच एजेंसियों के निशाने पर रहा है। इससे पहले भी केंद्रीय एजेंसियां कोयला तस्करी, अवैध खनन और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के मामलों में कार्रवाई कर चुकी हैं। धनबाद और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में अवैध खनन को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला क्षेत्र में अवैध गतिविधियों का संबंध केवल खनन तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें परिवहन, भंडारण, फर्जी दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन का व्यापक नेटवर्क शामिल हो सकता है। इसी कारण ईडी इस मामले को केवल अवैध खनन नहीं बल्कि संभावित आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के दृष्टिकोण से भी देख रही है।
जांच पूरी होने के बाद होगा बड़ा खुलासा
फिलहाल सभी ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन जारी है और ईडी ने आधिकारिक तौर पर बरामदगी या पूछताछ से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और जब्त दस्तावेजों व डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद ही पूरे मामले का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।
झारखंड में चल रही यह कार्रवाई अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच तथा संभावित वित्तीय लेन-देन की परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।



