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स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में बदहाल एंबुलेंस सेवा, मरीजों को समय पर नहीं मिल रही सुविधा

जामताड़ा के करमाटांड़ प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने एंबुलेंस और चिकित्सकीय व्यवस्था में सुधार की मांग की।

बदहाल एंबुलेंस सेवा को लेकर झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ प्रखंड में ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर एंबुलेंस तथा आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती। इसका सबसे अधिक असर गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें गंभीर परिस्थितियों में निजी वाहनों और निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारी जैसी आपात स्थितियों में 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने के बावजूद कई बार वाहन समय पर नहीं पहुंचता। ऐसे में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो जाती है, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई परिवारों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें निजी वाहन किराए पर लेने पड़ते हैं, जिसके कारण आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं लगभग भगवान भरोसे रह जाती हैं। रात के समय न तो पर्याप्त चिकित्सा कर्मी उपलब्ध रहते हैं और न ही आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो पाती हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

करमाटांड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व कृषि मंत्री और पूर्व विधायक रणधीर कुमार सिंह के प्रयास से स्वास्थ्य केंद्र को एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि यह एंबुलेंस लंबे समय से खराब पड़ी हुई है और अस्पताल परिसर में खड़ी-खड़ी जंग खा रही है। लोगों का कहना है कि यदि इस एंबुलेंस की मरम्मत कर इसे चालू कर दिया जाए तो क्षेत्र के मरीजों को काफी राहत मिल सकती है।

ग्रामीण हैस्वादर अली, अख्तर अंसारी, सौरभ गुप्ता और प्रकाश यादव सहित कई लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि रात के समय मरीजों को न तो समय पर एंबुलेंस मिलती है और न ही चिकित्सक उपलब्ध रहते हैं। कई बार गंभीर मरीजों को दूसरे शहरों के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है। उनका मानना है कि यदि स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन, चिकित्सक और एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

वहीं करमाटांड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. विशाल कुमार ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के पास स्वयं की कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार द्वारा संचालित 108 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से मरीजों को वाहन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर मरीजों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश करता है।

हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि केवल 108 सेवा पर निर्भर रहने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर स्थायी एंबुलेंस सुविधा और पर्याप्त स्वास्थ्य संसाधनों की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को तत्काल सहायता मिल सकेगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठ रहे सवाल अब चर्चा का विषय बन गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि खराब पड़ी एंबुलेंस को जल्द चालू किया जाए, स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाया जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा में सुधार होना क्षेत्र के लोगों की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

फिलहाल करमाटांड़ क्षेत्र के लोग बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों पर कितना गंभीरता से कार्रवाई करते हैं और क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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