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Pratyusha Banerjee Case: 10 साल बाद Rahul Raj Singh को राहत, आखिरी कॉल रिकॉर्डिंग बनी अहम कड़ी

‘बालिका वधू’ की आनंदी यानी प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल राज सिंह को किया आरोपमुक्त, अंतिम फोन बातचीत और पर्याप्त सबूतों की कमी पर हुई सुनवाई।

Pratyusha Banerjee Case: 10 साल बाद राहुल राज सिंह को बड़ी राहत, आखिरी कॉल रिकॉर्डिंग की हुई चर्चा

टीवी इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की मौत से जुड़े मामले में करीब 10 साल बाद बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। ‘बालिका वधू’ सीरियल में आनंदी का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुईं प्रत्युषा बनर्जी की अप्रैल 2016 में मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके तत्कालीन पार्टनर राहुल राज सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने सहित कई आरोप लगाए गए थे। अब 30 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल राज सिंह को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद एक दशक से जारी कानूनी कार्यवाही में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। <Cite refs={[“turn289957search0″,”turn289957search2”]}/>

इस मामले में राहुल राज सिंह की ओर से पेश वकीलों ने प्रत्युषा और राहुल के बीच हुई अंतिम फोन बातचीत का हवाला दिया था। उनका तर्क था कि बातचीत में राहुल प्रत्युषा को कोई बड़ा कदम न उठाने के लिए समझाते सुनाई दे रहे थे और उनसे मिलने के लिए वापस आने की बात कर रहे थे। अदालत के सामने इस बातचीत के साथ मामले में उपलब्ध अन्य सामग्री और आरोपों के आधार पर भी दलीलें रखी गईं। हाईकोर्ट ने माना कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता। <Cite refs={[“turn289957search1″,”turn289957search7”]}/>

2016 में हुई थी प्रत्युषा बनर्जी की मौत

प्रत्युषा बनर्जी को टीवी सीरियल ‘बालिका वधू’ में आनंदी की भूमिका से देशभर में पहचान मिली थी। उनके अभिनय ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। 1 अप्रैल 2016 को मुंबई के गोरेगांव इलाके में स्थित उनके किराये के अपार्टमेंट में उनकी मौत हो गई थी। उस समय उनकी उम्र 24 वर्ष थी।

प्रत्युषा की मौत के बाद उनके परिवार ने राहुल राज सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। राहुल पर कथित मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तथा आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे आरोप लगे। बाद में पुलिस ने इस मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया। हालांकि, राहुल ने आरोपों का विरोध किया और कानूनी प्रक्रिया के दौरान खुद को आरोपमुक्त किए जाने की मांग की। <Cite refs={[“turn289957search3″,”turn289957search11”]}/>

राहुल राज सिंह ने अदालत में क्या दलील दी?

राहुल राज सिंह की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री नहीं है। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी दर्ज किए जाने की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। वकीलों ने कहा कि मामले में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध स्थापित नहीं होता।

बचाव पक्ष ने प्रत्युषा और राहुल के बीच हुई आखिरी रिकॉर्डेड फोन बातचीत को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, बातचीत में राहुल प्रत्युषा को कोई बड़ा कदम न उठाने के लिए समझाते सुनाई देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल उनसे मिलने के लिए वापस आने की बात कर रहे थे।

अदालत के सामने रखी गई इन दलीलों ने मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि अंतिम बातचीत की व्याख्या बचाव पक्ष की दलीलों का हिस्सा थी। हाईकोर्ट का फैसला पूरे मामले में उपलब्ध सामग्री और कानूनी आधारों पर आया। <Cite refs={[“turn289957search1″,”turn289957search2”]}/>

आखिरी फोन कॉल रिकॉर्डिंग क्यों बनी चर्चा का विषय?

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा प्रत्युषा और राहुल के बीच हुई आखिरी फोन बातचीत को लेकर हुई। राहुल के वकीलों ने अदालत में इस बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि राहुल उन्हें कोई कठोर कदम उठाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बातचीत में राहुल की ओर से प्रत्युषा के प्रति चिंता और उनसे मिलने के लिए लौटने की बात को अपनी दलील का आधार बनाया।

अदालत ने बचाव पक्ष की इन दलीलों पर विचार किया। इस बातचीत का महत्व इसलिए भी बढ़ गया, क्योंकि मामला आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से संबंधित था। ऐसे मामलों में अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह देखना होता है कि आरोपों को आगे मुकदमे के लिए ले जाने का पर्याप्त कानूनी आधार है या नहीं।

हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त करने का फैसला दिया। इसका अर्थ है कि इस मामले में उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप पर ट्रायल आगे नहीं चलेगा, जब तक किसी सक्षम अदालत के आगे के आदेश से स्थिति में बदलाव न हो। <Cite refs={[“turn289957search2″,”turn289957search7”]}/>

पहले निचली अदालत ने खारिज की थी आरोपमुक्त करने की मांग

इस मामले की कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक चली। पुलिस ने 2018 में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद राहुल राज सिंह ने खुद को आरोपमुक्त करने के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अगस्त 2023 में मुंबई की डिंडोशी सत्र अदालत ने उनकी आरोपमुक्ति की मांग स्वीकार नहीं की थी। उस समय अदालत की टिप्पणियों में प्रत्युषा की मौत से पहले कथित शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद राहुल ने हाईकोर्ट में राहत के लिए याचिका दायर की।

अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें मामले से आरोपमुक्त कर दिया। इस फैसले ने पहले की कानूनी स्थिति को बदल दिया है और लगभग एक दशक से चल रहे मामले में नया मोड़ ला दिया है। <Cite refs={[“turn289957search3″,”turn289957search8”]}/>

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का क्या है मतलब?

किसी आरोपी को आरोपमुक्त करने का फैसला और सभी आरोपों को तथ्यात्मक रूप से झूठा साबित करना एक ही बात नहीं है। आरोपमुक्ति का अर्थ है कि अदालत ने उपलब्ध सामग्री और लागू कानूनी कसौटी के आधार पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

राहुल राज सिंह के मामले में हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप को ट्रायल तक ले जाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। इस कारण उनके खिलाफ इस मामले में मुकदमा आगे नहीं चलेगा। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण पर आया है।

प्रत्युषा के परिवार की ओर से लगाए गए पुराने आरोप और राहुल की ओर से पेश की गई दलीलें इस मामले का हिस्सा रहे हैं। अदालत का ताजा फैसला उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी आधारों के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn289957search0″,”turn289957search8”]}/>

10 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना मामला

प्रत्युषा बनर्जी की मौत ने 2016 में टीवी इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को गहरा झटका दिया था। ‘बालिका वधू’ से मिली लोकप्रियता के कारण उनकी निजी जिंदगी और मौत से जुड़ी खबरें लंबे समय तक चर्चा में रहीं। अब करीब एक दशक बाद हाईकोर्ट के फैसले ने इस मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त किए जाने के बाद मामले की कानूनी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। फैसले में अंतिम फोन बातचीत को लेकर बचाव पक्ष की दलीलों और पर्याप्त सबूतों के सवाल पर चर्चा हुई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह ध्यान दिलाया है कि किसी भी आपराधिक मामले में आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत के निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

फिलहाल इस मामले का प्रमुख घटनाक्रम बॉम्बे हाईकोर्ट का 30 सितंबर 2026 का फैसला है। अदालत ने राहुल राज सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपमुक्त कर दिया है। आगे किसी कानूनी चुनौती या आदेश से संबंधित जानकारी सामने आती है, तो उससे मामले की स्थिति में बदलाव हो सकता है। <Cite refs={[“turn289957search2″,”turn289957search11”]}/>

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