दिल्ली में ट्रेड वार्ता के बीच भारत पर ट्रंप का नया टैरिफ वार, ‘फोर्स्ड लेबर’ बना बहाना

चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, ब्राज़ील और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाएगा।

वॉशिंगटन:

कानूनी चुनौतियों के बाद अपने टैरिफ एजेंडे को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने के आरोप में कम से कम 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर नए टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा प्रस्तावित इन टैरिफ की दरें 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक हो सकती हैं। यह जानकारी सरकार की एक आधिकारिक फाइलिंग में सामने आई है।

बुधवार तड़के जारी USTR की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा, मेक्सिको, ताइवान और यूनाइटेड किंगडम पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इन देशों पर आरोप है कि उन्होंने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया।

वहीं, चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, ब्राज़ील और स्विट्जरलैंड सहित कई अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन देशों ने जबरन श्रम से जुड़े व्यापारिक मुद्दों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है।

नए टैरिफ तुरंत लागू नहीं होंगे। इन्हें लागू करने से पहले सार्वजनिक टिप्पणियों (Public Comments) और समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि, यदि ये टैरिफ लागू किए जाते हैं, तो इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन कानूनी सीमाओं से बचने का रास्ता मिल सकता है, जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके टैरिफ संबंधी अधिकारों पर लगाई हैं।

ट्रंप और अधिक टैरिफ कैसे लगाने की तैयारी कर रहे हैं?

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब कुछ महीने पहले वॉशिंगटन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (b)(1) के तहत अपने व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ जांच शुरू की थी। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या ये देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं और क्या इसका अमेरिकी व्यापार तथा वाणिज्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

जांच के आधार पर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि कई देशों ने जबरन श्रम से जुड़े आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है। इसी वजह से इन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के मुख्य वार्ताकार Brendan Lynch के नेतृत्व में अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ व्यापार वार्ता के लिए New Delhi पहुंचा हुआ है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को अंतिम रूप देना है। यह चर्चा फरवरी में दोनों पक्षों के बीच तय किए गए ढांचे (Framework) के आधार पर आगे बढ़ रही है।

भारत की ओर से वार्ता का नेतृत्व Darpan Jain करेंगे, जो वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के अंतिम बिंदुओं पर सहमति बनाने के साथ-साथ प्रस्तावित Bilateral Trade Agreement (BTA) के तहत भी बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।

इस वार्ता में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है, उनमें बाजार पहुंच (Market Access), गैर-टैरिफ बाधाएं (Non-Tariff Barriers), सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा (Customs and Trade Facilitation), निवेश प्रोत्साहन (Investment Promotion) तथा आर्थिक सुरक्षा सहयोग (Economic Security Cooperation) शामिल हैं। दोनों देशों का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाना तथा द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

नई दिल्ली और वॉशिंगटन ने 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी किया था, जिसमें प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण की रूपरेखा पेश की गई थी।

इस प्रस्तावित समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने और भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़े कुछ शुल्कों को हटाने पर सहमति जताई थी।

प्रस्तावित टैरिफ कटौती को भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कई महीनों से अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव बना हुआ था। इससे पहले अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ का असर भारतीय निर्यात और निवेशकों के भरोसे पर पड़ा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को मजबूती मिलेगी, भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

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