
Sensex Nifty Today: शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार संभला। सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में लौटे, जबकि निवेशकों की नजर तेल कीमतों, फेड नीति और वैश्विक तनाव पर बनी हुई है।
मुंबई। वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती गिरावट से मजबूत वापसी की। कारोबार की शुरुआत लाल निशान में हुई, लेकिन निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से कुछ ही देर में बाजार संभल गया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करने लगे।
शुरुआती कारोबार में दिखा दबाव
30 जुलाई की सुबह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 153.59 अंक गिरकर 77,501.01 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 लगभग 18.25 अंक टूटकर 24,231.95 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
विश्लेषकों के अनुसार शुरुआती कमजोरी की मुख्य वजहें थीं:
- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव,
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल,
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला,
- और वैश्विक निवेशकों में सतर्कता का माहौल।
कुछ ही मिनटों में लौटी तेजी
हालांकि बाजार में गिरावट ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। शुरुआती दबाव के बाद घरेलू निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू कर दी, जिससे बाजार में तेजी लौट आई।
सुबह करीब 9:20 बजे तक:
- सेंसेक्स 10.01 अंक चढ़कर 77,664.61 पर पहुंच गया,
- जबकि निफ्टी 11.30 अंक बढ़कर 24,261.50 के स्तर पर कारोबार करने लगा।
यह रिकवरी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।
घरेलू निवेशकों का भरोसा बना सहारा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेतक बाजार को सहारा दे रहे हैं। लगातार बढ़ती घरेलू निवेशक भागीदारी, एसआईपी निवेश और मजबूत कॉरपोरेट आय भी बाजार की स्थिरता में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित किया है।
किन सेक्टरों में दिखी मजबूती?
शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और कुछ चुनिंदा आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। वहीं तेल एवं गैस तथा धातु क्षेत्र के शेयरों पर वैश्विक कमोडिटी कीमतों का असर बना रहा।
विश्लेषकों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इसका असर आने वाले दिनों में ऊर्जा, परिवहन और उपभोक्ता क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ सकता है।
फेडरल रिजर्व का फैसला क्यों अहम?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। हालांकि दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन फेड के भविष्य के संकेतों पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है।
यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो विदेशी पूंजी उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी बाजारों की ओर जा सकती है। यही कारण है कि भारतीय निवेशक भी फेड की आगामी नीति बैठकों पर नजर बनाए हुए हैं।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की नीति,
- अमेरिका-ईरान और मध्य पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम,
- कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें,
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का निवेश रुख,
- और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे।
निवेशकों को मिली राहत, लेकिन उतार-चढ़ाव संभव
फिलहाल शुरुआती झटके के बाद बाजार की तेज रिकवरी ने निवेशकों को राहत जरूर दी है। इससे यह संकेत मिला है कि बाजार में खरीदारी का आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान दें।