
RBI Repo Rate 5.25%: होम लोन और ऑटो लोन लेने वालों को राहत, EMI फिलहाल रहेगी स्थिर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगस्त 2026 की समीक्षा बैठक में RBI Repo Rate 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इस निर्णय से लाखों होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज लेने वालों को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि उनकी EMI में अभी कोई बदलाव नहीं होगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 से 5 अगस्त तक चली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है।
क्या है रेपो रेट और इसका असर?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए धन उधार देता है। जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए उधारी महंगी हो जाती है और इसका असर होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर पड़ता है।
चूंकि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए:
- मौजूदा फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की EMI नहीं बढ़ेगी,
- ऑटो लोन की मासिक किस्तें फिलहाल स्थिर रहेंगी,
- बैंकों की उधारी लागत में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा।
यह फैसला खास तौर पर उन परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है जो पहले से होम लोन चुका रहे हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित थे।
आरबीआई ने क्यों नहीं बदली ब्याज दर?
आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और संभावित महंगाई के दबाव को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव उचित नहीं माना गया।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में महंगाई आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर जा सकती है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखा है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई आर्थिक गतिविधियों, वैश्विक बाजारों और घरेलू महंगाई के रुझानों पर लगातार नजर बनाए रखेगा।
GDP वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 6.7%
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जून 2026 की समीक्षा में इसे 6.6 प्रतिशत रखा गया था।
तिमाही आधार पर आरबीआई का अनुमान
- जून 2026 तिमाही: 7.0%
- सितंबर 2026 तिमाही: 6.4%
- दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%
- मार्च 2027 तिमाही: 6.8%
यह संकेत देता है कि आरबीआई भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाओं को लेकर अपेक्षाकृत आशावादी है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।
होम लोन लेने वालों के लिए इसका क्या मतलब है?
यदि आपका होम लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है, तो इस फैसले के बाद आपकी EMI तुरंत नहीं बदलेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति का 30 लाख रुपये का होम लोन चल रहा है, तो रेपो रेट स्थिर रहने से उसकी मासिक किस्त पहले जैसी ही बनी रहेगी।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में यदि महंगाई बढ़ती है और आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ सकती है।
महंगाई पर आरबीआई की चिंता
आरबीआई ने यह भी माना कि खाद्य कीमतों, वैश्विक कमोडिटी बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण महंगाई पर दबाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आने वाले महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) लगातार ऊंचा रहता है, तो आरबीआई अगली या उसके बाद की समीक्षा में ब्याज दरों पर पुनर्विचार कर सकता है।
बाजार और निवेशकों की नजर अब किस पर?
आरबीआई के इस फैसले के बाद अब बाजार की नजर मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर रहेगी:
- आने वाले महंगाई के आंकड़े,
- कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें,
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति,
- और आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा।
शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर के निवेशक भी यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक का अगला कदम दर स्थिर रखने, दर घटाने या दर बढ़ाने की दिशा में हो सकता है।