
Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। जम्मू की एक अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। इस आदेश के साथ ही उसके खिलाफ भारत में गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने यानी ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ की प्रक्रिया भी आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले को आतंकवाद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि हाफिज सईद फिलहाल पाकिस्तान में मौजूद है और उसे भारत लाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में नए आपराधिक कानूनों के तहत उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी जानबूझकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया से बच रहा है और उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने एनआईए की मांग स्वीकार करते हुए हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद जांच एजेंसी अब उसे भगोड़ा घोषित कराने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ाएगी।
एनआईए ने 6 जुलाई को दाखिल अपनी पूरक चार्जशीट में हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले का प्रमुख साजिशकर्ता बताया है। एजेंसी का दावा है कि हमले की योजना पाकिस्तान में बैठकर तैयार की गई थी और इसमें हाफिज सईद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने अदालत से कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
नए आपराधिक कानूनों के तहत यदि कोई आरोपी देश से फरार हो, अदालत में बार-बार बुलाने के बावजूद जानबूझकर पेश न हो और उसके खिलाफ गंभीर अपराधों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों, तो अदालत उसकी गैरमौजूदगी में भी मुकदमे की सुनवाई कर सकती है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत एनआईए ने अदालत का रुख किया था।
जांच एजेंसी का कहना है कि हाफिज सईद लंबे समय से भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़े मामलों में वांछित रहा है। पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी कई ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिन्हें एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
इससे पहले एनआईए अपनी पहली चार्जशीट में भी कई आरोपियों के नाम शामिल कर चुकी है, जिनमें पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों का भी उल्लेख किया गया था। एजेंसी लगातार इस मामले की जांच कर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।
पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज करते हुए हमले की साजिश, वित्तीय नेटवर्क और आतंकियों के सहयोगियों की भूमिका की भी जांच शुरू की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट और ट्रायल इन एब्सेंशिया की प्रक्रिया आतंकवाद से जुड़े मामलों में न्यायिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। फिलहाल इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और एनआईए की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।