
New Zealand Wild Cat: तीन साल तक वन विभाग को चकमा देने वाली ‘नाइन लाइव्स’ का अंत
न्यूजीलैंड में पिछले तीन वर्षों से वन अधिकारियों के लिए चुनौती बनी हुई ‘नाइन लाइव्स’ नाम की जंगली शिकारी बिल्ली को आखिरकार पकड़कर मार दिया गया। यह बिल्ली लंबे समय से दुर्लभ पाटेके बत्तखों, कीवी चूजों, गेको और अन्य स्थानीय वन्यजीवों का शिकार कर रही थी। इसके कारण संरक्षण अधिकारियों के सामने स्थानीय जैव विविधता को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।
संरक्षण परियोजना ‘पेस्ट फ्री पुरेरुआ’ के अनुसार, इस बिल्ली को पकड़ने के लिए 2023 से लगातार अभियान चलाया जा रहा था। नाइट विजन कैमरे, विशेष जाल, सेंसर और निगरानी उपकरण लगाए गए, लेकिन हर बार यह बिल्ली अधिकारियों को चकमा देकर बच निकलती थी। इसी वजह से इसे स्थानीय लोगों और वन अधिकारियों ने ‘नाइन लाइव्स’ नाम दिया था।
दुर्लभ वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा
न्यूजीलैंड दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कई पक्षी और छोटे जीव केवल वहीं पाए जाते हैं। इनमें कीवी और पाटेके (ब्राउन टील) जैसी प्रजातियां विशेष रूप से संरक्षित मानी जाती हैं।
अधिकारियों के अनुसार, 2024 में संरक्षण क्षेत्र में छोड़ी गई 20 दुर्लभ पाटेके बत्तखों में से 15 का शिकार इसी बिल्ली ने किया था। इसके अलावा कई कीवी चूजों और छोटे सरीसृपों के गायब होने के पीछे भी उसी के शामिल होने की आशंका जताई गई थी।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूजीलैंड की कई स्थानीय प्रजातियां ऐसे बाहरी शिकारी जीवों के खिलाफ प्राकृतिक रूप से विकसित नहीं हुई हैं। इसलिए जंगली बिल्लियां वहां के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा मानी जाती हैं।
तीन साल तक चला पीछा
‘पेस्ट फ्री पुरेरुआ’ परियोजना की टीम ने इस बिल्ली को पकड़ने के लिए कई रणनीतियां अपनाईं।
अभियान में इस्तेमाल किए गए उपाय:
- नाइट कैमरे
- मोशन सेंसर
- विशेष गंध वाले जाल
- भोजन आधारित आकर्षण तकनीक
- लगातार क्षेत्रीय निगरानी
इसके बावजूद बिल्ली हर बार जाल से बच निकलती थी। कई बार कैमरों में उसकी तस्वीरें तो कैद हुईं, लेकिन उसे पकड़ना संभव नहीं हो सका। यही कारण था कि यह मामला न्यूजीलैंड के संरक्षण विभाग के लिए एक प्रतीकात्मक चुनौती बन गया था।
आखिर कैसे पकड़ी गई?
अंततः हाल ही में लगाए गए एक विशेष जाल में बिल्ली फंस गई। अधिकारियों ने पुष्टि की कि वह वही ‘नाइन लाइव्स’ थी, जिसकी तलाश पिछले तीन वर्षों से की जा रही थी।
संरक्षण विभाग ने बाद में उसे गोली मार दी, ताकि वह दोबारा दुर्लभ वन्यजीवों के लिए खतरा न बन सके। विभाग का कहना है कि यह फैसला स्थानीय संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
देशभर में छिड़ी बहस
बिल्ली के मारे जाने के बाद न्यूजीलैंड में तीखी बहस शुरू हो गई है।
समर्थन करने वालों का तर्क
- संकटग्रस्त पक्षियों की रक्षा जरूरी थी
- स्थानीय जैव विविधता को बचाने के लिए कार्रवाई आवश्यक थी
- संरक्षण परियोजना की यह बड़ी सफलता है
- एक शिकारी के कारण कई दुर्लभ प्रजातियां खतरे में थीं
विरोध करने वालों की राय
- बिल्ली को मारना क्रूर कदम है
- उसे पकड़कर पुनर्वास किया जा सकता था
- वन्यजीव संरक्षण और पशु अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है
- हत्या अंतिम विकल्प नहीं होना चाहिए था
यह बहस अब केवल एक बिल्ली तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण बनाम पशु अधिकार के व्यापक प्रश्न से जुड़ गई है।
न्यूजीलैंड में ‘पेस्ट फ्री’ अभियान क्या है?
न्यूजीलैंड सरकार और कई संरक्षण संगठन लंबे समय से ‘Predator Free New Zealand’ अभियान चला रहे हैं। इसका उद्देश्य चूहों, स्टोट, जंगली बिल्लियों और अन्य बाहरी शिकारी जीवों की संख्या को नियंत्रित करना है, ताकि स्थानीय पक्षियों और छोटे जीवों को बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे शिकारी जीवों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो कई स्थानीय प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।
क्या यह संरक्षण की सफलता है?
वन विभाग इस कार्रवाई को स्थानीय वन्यजीवों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि एक अकेली शिकारी बिल्ली ने दर्जनों दुर्लभ जीवों को नुकसान पहुंचाया और यदि उसे नहीं रोका जाता, तो संरक्षण कार्यक्रमों पर गंभीर असर पड़ सकता था।
हालांकि पशु अधिकार समूहों का मानना है कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए अधिक मानवीय और वैज्ञानिक विकल्प विकसित किए जाने चाहिए।