
Nana Patekar ने Pankaj Tripathi को क्यों लगाई थी फटकार? बोले- दोबारा छोटा रोल किया तो मारूंगा!
बॉलीवुड में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं, जो कलाकारों के बीच के रिश्तों और उनके काम के प्रति नजरिए को समझने का मौका देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर और अपनी शानदार अदाकारी के लिए मशहूर पंकज त्रिपाठी से जुड़ा है। बताया जाता है कि फिल्म ‘काला’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने पंकज त्रिपाठी को एक छोटा किरदार निभाने पर फटकार लगाई थी। उन्होंने पंकज को अपनी प्रतिभा पहचानने और अपनी काबिलियत के मुताबिक भूमिकाएं चुनने की सलाह दी थी।
यह किस्सा इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि आज पंकज त्रिपाठी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उनकी अदाकारी की खासियत यह है कि वह छोटे से छोटे किरदार में भी अपनी अलग पहचान बना लेते हैं।
फिल्म ‘काला’ से जुड़ा है किस्सा
साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘काला’ में सुपरस्टार रजनीकांत मुख्य भूमिका में नजर आए थे। इस फिल्म में नाना पाटेकर ने भी अहम किरदार निभाया था। फिल्म में उन्होंने एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता हरिदेव अभयंकर की भूमिका निभाई थी।
पंकज त्रिपाठी भी इस फिल्म का हिस्सा थे। उनके किरदार का स्क्रीन टाइम सीमित था। इसी संदर्भ में नाना पाटेकर और पंकज त्रिपाठी से जुड़ा यह किस्सा सुनने को मिलता है।
बताया जाता है कि नाना पाटेकर को यह बात पसंद नहीं आई कि पंकज त्रिपाठी जैसे प्रतिभाशाली अभिनेता इतने छोटे किरदार में काम कर रहे हैं। उन्हें लगा कि पंकज को अपनी क्षमता के अनुरूप भूमिकाएं चुननी चाहिए।
नाना पाटेकर ने क्यों लगाई थी फटकार?
किस्से के मुताबिक, नाना पाटेकर ने पंकज त्रिपाठी से उनके छोटे किरदार को लेकर सवाल किया। पंकज ने कथित तौर पर बताया कि वह नाना पाटेकर और रजनीकांत जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अवसर नहीं छोड़ना चाहते थे।
इसी बात पर नाना पाटेकर ने उन्हें अपनी प्रतिभा और अभिनय क्षमता का सम्मान करने की सलाह दी। उनसे जुड़ी कहानी में नाना के कड़क अंदाज में कही गई यह बात भी सुनाई जाती है कि अगर उन्होंने दोबारा इतना छोटा रोल किया, तो वह उन्हें मारेंगे।
हालांकि, इस बातचीत के शब्दशः विवरण की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इसलिए इस कथन को प्रमाणित संवाद के बजाय प्रचलित किस्से के रूप में ही देखना उचित होगा।
पंकज त्रिपाठी की अदाकारी ने बनाई अलग पहचान
पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए हैं। उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ वेब सीरीज में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। उनकी खासियत यह है कि वह सहज अभिनय के जरिए किरदारों को वास्तविक और यादगार बना देते हैं।
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘मसान’, ‘न्यूटन’, ‘स्त्री’ और ‘मिमी’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। वहीं, ‘मिर्जापुर’ में कालीन भैया का किरदार उनकी सबसे चर्चित भूमिकाओं में शामिल है।
उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसके स्क्रीन टाइम से नहीं, बल्कि उसके अभिनय की गुणवत्ता से भी बनती है।
नाना पाटेकर की सलाह से क्या मिलती है सीख?
इस किस्से का सबसे दिलचस्प पहलू कलाकार की अपनी प्रतिभा को पहचानने से जुड़ा है। अभिनय की दुनिया में नए कलाकारों के लिए बड़े सितारों के साथ काम करना सीखने का अवसर हो सकता है। वहीं, अनुभवी कलाकारों के लिए अपनी भूमिकाओं का चयन करना और अपनी क्षमता के अनुरूप अवसर तलाशना भी महत्वपूर्ण है।
नाना पाटेकर और पंकज त्रिपाठी से जुड़ी इस कहानी को इसी नजरिए से देखा जा सकता है। हालांकि, किसी भूमिका का छोटा होना अपने आप में उसकी अहमियत कम नहीं करता। कई बार छोटा किरदार भी कहानी पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है।
बॉलीवुड के ऐसे किस्से क्यों हैं खास?
फिल्मी दुनिया के ऐसे किस्से दर्शकों को पर्दे के पीछे की दुनिया से जोड़ते हैं। वे यह भी दिखाते हैं कि अभिनय के क्षेत्र में प्रतिभा, मेहनत, सही अवसर और आत्मविश्वास कितने महत्वपूर्ण हैं।
पंकज त्रिपाठी ने अपने अभिनय से यह साबित किया है कि लगातार मेहनत और किरदारों के प्रति ईमानदारी से दर्शकों का भरोसा जीता जा सकता है। वहीं, नाना पाटेकर अपनी बेबाक शैली और प्रभावशाली अभिनय के लिए जाने जाते हैं।
दोनों कलाकारों से जुड़ा यह किस्सा आज भी एक दिलचस्प चर्चा का विषय है। लेकिन इसे साझा करते समय कथित बातचीत और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।