
KBC 18: ट्रांसजेंडर डॉक्टर प्राची राठौड़ की कहानी सुन भावुक हुए अमिताभ बच्चन
KBC 18 में इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने दर्शकों के साथ-साथ शो के होस्ट अमिताभ बच्चन को भी भावुक कर दिया। शो की हॉट सीट पर ट्रांसजेंडर डॉक्टर प्राची राठौड़ पहुंचीं और उन्होंने अपनी जिंदगी में आए संघर्षों, जेंडर पहचान को लेकर परिवार और समाज से मिली चुनौतियों तथा डॉक्टर बनने तक के सफर के बारे में खुलकर बात की।
प्राची ने बताया कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जब उन्हें अपनी जेंडर पहचान को लेकर परिवार और समाज की मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस कठिन समय में उन्हें हैदराबाद की ट्रांसजेंडर कम्युनिटी से ऐसा सहारा मिला, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
हॉट सीट पर साझा की जिंदगी की कहानी
KBC 18 के एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने प्राची से उनके जेंडर ट्रांजिशन के सफर और उस दौरान मिले सपोर्ट के बारे में सवाल किया। प्राची ने बताया कि बचपन से लेकर परिवार को अपनी जेंडर पहचान के बारे में बताने तक उनके माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के अन्य सदस्य उनके साथ थे।
लेकिन जब उन्होंने अपने जेंडर ट्रांजिशन के बारे में परिवार को बताया तो उनके लिए इस बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं था। प्राची के मुताबिक, उनके माता-पिता के लिए इस स्थिति को समझना और स्वीकार करना बेहद मुश्किल रहा।
परिवार से मुश्किलें, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी
प्राची ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि उनके परिवार ने उनके लिए बहुत कुछ किया था, लेकिन जेंडर ट्रांजिशन की बात सामने आने के बाद परिस्थितियां बदल गईं।
यह उनके जीवन का बेहद चुनौतीपूर्ण दौर था। एक तरफ उन्हें अपनी पहचान को लेकर संघर्ष करना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ समाज की सोच और स्वीकार्यता की कमी भी उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर आई।
इसके बावजूद प्राची ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
हैदराबाद की ट्रांसजेंडर कम्युनिटी बनी सहारा
जब प्राची को परिवार की ओर से वह स्वीकार्यता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी, तब हैदराबाद की ट्रांसजेंडर कम्युनिटी ने उनका साथ दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्राची ने बताया कि हैदराबाद में ट्रांसजेंडर समुदाय की कई ‘हवेलियां’ हैं, जहां समुदाय के लोग एक-दूसरे के साथ रहते हैं। उन्होंने इस कम्युनिटी को अपने लिए एक दूसरे परिवार जैसा बताया।
समुदाय के लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मुश्किल परिस्थितियों में वे उनके साथ खड़े रहेंगे। इस समर्थन ने प्राची को अपनी पढ़ाई और करियर जारी रखने के लिए हिम्मत दी।
डॉक्टर बनने के बाद भी आसान नहीं रहा सफर
प्राची ने सिर्फ जेंडर पहचान के स्तर पर ही मुश्किलें नहीं झेलीं, बल्कि डॉक्टर बनने के बाद भी उन्हें नौकरी हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि उन्होंने कई जगह अपना रिज्यूमे भेजा और इंटरव्यू दिए। उन्होंने नौकरी पाने के लिए पूरी कोशिश की, लेकिन कई बार उनकी जेंडर पहचान उनके रास्ते में बाधा बनी।
उनका अनुभव बताता है कि शिक्षा और योग्यता हासिल करने के बाद भी ट्रांसजेंडर लोगों को रोजगार के क्षेत्र में सामाजिक स्वीकार्यता और भेदभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
पढ़ाई पूरी कर बनीं डॉक्टर
इन तमाम मुश्किलों के बावजूद प्राची ने अपनी पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया।
उनकी कहानी सिर्फ व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अगर व्यक्ति अपने लक्ष्य पर कायम रहे तो वह आगे बढ़ सकता है।
अमिताभ बच्चन ने भी उनकी इस उपलब्धि और हिम्मत की सराहना की। उन्होंने प्राची के संघर्ष को सम्मान दिया और उनके जज्बे की तारीफ की।
अमिताभ बच्चन ने की हिम्मत की तारीफ
प्राची की कहानी सुनने के बाद अमिताभ बच्चन ने उनके संघर्ष और दृढ़ता की सराहना की। प्राची ने जिस तरह समाज की अस्वीकृति और व्यक्तिगत मुश्किलों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की और मेडिकल प्रोफेशन में अपनी जगह बनाई, उसे शो में खास तौर पर सराहा गया।
अमिताभ बच्चन की प्रतिक्रिया ने इस पूरे सेगमेंट को भावुक बना दिया।
नौकरी में भेदभाव का अनुभव
प्राची ने बताया कि डॉक्टर बनने के बाद भी जब उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की तो उन्हें कई जगह मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
रिज्यूमे भेजने और इंटरव्यू देने के बावजूद कई जगह उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। उनके मुताबिक, उनकी जेंडर पहचान को लेकर लोगों की सोच ने उनके लिए नौकरी पाना मुश्किल बनाया।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए शिक्षा हासिल करने के बाद रोजगार और सामाजिक स्वीकार्यता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
KBC 18 में संघर्ष की कहानियां बन रहीं चर्चा का हिस्सा
KBC 18 में इस सीजन में अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतियोगियों की व्यक्तिगत कहानियां भी चर्चा में हैं। शो सिर्फ सवाल-जवाब और पुरस्कार राशि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रतियोगियों के जीवन के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों को भी सामने लाता है।
प्राची राठौड़ की कहानी भी इसी वजह से खास रही। उनकी कहानी में व्यक्तिगत पहचान, परिवार, समाज, शिक्षा और करियर—इन सभी पहलुओं का संघर्ष दिखाई दिया।
प्राची की कहानी से क्या संदेश मिलता है?
प्राची राठौड़ का सफर यह संदेश देता है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके सपनों और उसकी योग्यता के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।
उन्होंने जिन परिस्थितियों का सामना किया, उनमें परिवार की असहमति, सामाजिक अस्वीकार्यता और नौकरी पाने में मुश्किलें शामिल रहीं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बनने में सफलता हासिल की।
उनकी कहानी समाज में ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और समान अवसर की जरूरत को भी सामने लाती है।
निष्कर्ष
KBC 18 में डॉक्टर प्राची राठौड़ की कहानी ने एक बार फिर यह दिखाया कि टेलीविजन के मंच पर आने वाली व्यक्तिगत कहानियां कितनी प्रभावशाली हो सकती हैं।
प्राची ने जेंडर ट्रांजिशन के दौरान परिवार की मुश्किल स्वीकार्यता, समाज के व्यवहार और नौकरी पाने में आई परेशानियों के बारे में बात की। वहीं हैदराबाद की ट्रांसजेंडर कम्युनिटी से मिले समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी सुनकर अमिताभ बच्चन ने भी उनके संघर्ष और हिम्मत की सराहना की।