Iran America Conflict: ईरान ने अमेरिकी हमलों को बताया ‘युद्ध अपराध’, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव; दुनिया की नजर तेल और बाजार पर

फारस की खाड़ी और ओमान सागर में ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने कड़ा विरोध जताया, वॉशिंगटन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप; तनाव बढ़ने से तेल, व्यापार और ग्लोबल मार्केट पर असर की चिंता

दुनिया की नजर एक बार फिर पश्चिम एशिया पर टिक गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान सागर में ईरानी वाणिज्यिक तेल टैंकरों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अवैध और आक्रामक बताते हुए ‘युद्ध अपराध’ करार दिया है।

ईरान का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई उसके खिलाफ जारी सैन्य दबाव, समुद्री नाकेबंदी और आर्थिक युद्ध का हिस्सा है। तेहरान ने दावा किया है कि इस तरह की कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों का उल्लंघन है और इससे अंतरराष्ट्रीय शांति तथा समुद्री व्यापार की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को क्षेत्र में अपनी कार्रवाई के संभावित परिणामों की जिम्मेदारी लेनी होगी।

अमेरिका ने क्यों की टैंकरों पर कार्रवाई?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने 5 सितंबर को तीन ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिका की ओर से कहा गया कि यह कदम ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में उठाया गया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरानी IRGC ने क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि ये जहाज ईरान के उस नेटवर्क का हिस्सा थे, जिससे IRGC और उससे जुड़े क्षेत्रीय समूहों को आर्थिक मदद मिलती थी।

यानी दोनों देशों की तरफ से कार्रवाई को अपने-अपने बचाव और जवाबी कार्रवाई के तौर पर पेश किया जा रहा है। यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।

ईरान ने लगाया अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने बेहद सख्त बयान जारी किया। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। तेहरान ने इसे न सिर्फ अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई बताया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और समुद्री व्यापार के लिए भी गंभीर खतरा बताया है।

ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि अगर अमेरिका की कार्रवाई जारी रहती है तो वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जवाब देगा। ऐसे बयानों से यह आशंका बढ़ रही है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव और ज्यादा गंभीर हो सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

इस पूरे विवाद में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है।

ताजा तनाव के बीच इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पहले ही प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और सुरक्षा जोखिम के कारण समुद्री यातायात सामान्य स्तर से काफी नीचे बना हुआ है।

अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक तनाव बना रहता है या जहाजों की आवाजाही में बड़ी बाधा आती है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं पड़ेगा। भारत समेत एशिया और यूरोप के कई देशों के लिए ऊर्जा आयात और समुद्री व्यापार महत्वपूर्ण है।

तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सबसे बड़ा आर्थिक असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। खाड़ी क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य घटनाक्रम से तेल की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बढ़ती है।

हालिया घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजार पहले से ही ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सतर्क है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में तेजी की संभावना बन सकती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन लागत और महंगाई तक पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि निवेशकों की नजर सिर्फ युद्ध क्षेत्र पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार, कच्चे तेल, शिपिंग और करेंसी मार्केट पर भी बनी हुई है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई से बढ़ी चिंता

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ तेल टैंकरों और अमेरिकी सहयोगी जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है। इन दावों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

इस तरह अमेरिका और ईरान के बीच कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला एक ऐसे समय में चल रहा है, जब पहले भी दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।

क्या बातचीत से शांत होगा मामला?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाएगा। क्या दोनों देश सैन्य कार्रवाई को और बढ़ाएंगे या फिर बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश होगी?

फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों में सख्ती दिखाई दे रही है। अमेरिका अपने सैन्य कदमों को सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि ईरान इन्हें अपनी संप्रभुता के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई बता रहा है।

अगर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो इसका असर पश्चिम एशिया के दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। वहीं, अगर कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुलता है और समुद्री मार्गों पर तनाव कम होता है तो वैश्विक बाजारों को भी राहत मिल सकती है।

कुल मिलाकर, Iran America Conflict अब सिर्फ दो देशों के बीच का सैन्य विवाद नहीं रह गया है। फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल की सप्लाई, समुद्री व्यापार और वैश्विक बाजार—इन सभी पर इस तनाव का असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजर इसी बात पर रहेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है या फिर दोनों देश बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं

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