सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को दोटूक संदेश, राजदूत विनय मोहन क्वात्रा की कड़ी टिप्पणी

अमेरिका में भारत के राजदूत ने कहा कि सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने वर्षों तक आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों से उस भावना को कमजोर किया।

Indus Waters Treaty India Pakistan: सिंधु जल संधि पर भारत का स्पष्ट रुख

Indus Waters Treaty India Pakistan को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के फैसले पर पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

इसी बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पाकिस्तान के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संधि सद्भावना और दोस्ती की भावना के साथ हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों में उसी भावना को खत्म कर दिया।


क्वात्रा ने क्या कहा?

अमेरिका में प्रकाशित एक लेख में विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से रोकने का भारत का निर्णय परिस्थितियों के अनुरूप और न्यायसंगत है।

उन्होंने कहा कि संधि की प्रस्तावना में दोनों देशों के बीच सद्भावना, सहयोग और मित्रता की भावना का स्पष्ट उल्लेख था, लेकिन पाकिस्तान ने वर्षों तक आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के जरिए उस मूल भावना को कमजोर किया।


आतंकी घटनाओं का किया उल्लेख

क्वात्रा ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक संधि का सम्मान किया, जबकि उसे कई गंभीर आतंकी घटनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने उदाहरण के तौर पर उल्लेख किया:

उनका कहना था कि इन घटनाओं के बावजूद भारत ने संधि की व्यवस्था को बनाए रखा।


जल परियोजनाओं में अड़चन का आरोप

राजदूत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान लगातार भारत की जल और पनबिजली परियोजनाओं में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें पैदा करता रहा।

उन्होंने कहा कि भारत ने समय-समय पर संधि में आधुनिक तकनीक और बदलती जरूरतों के अनुरूप सुधार के लिए बातचीत की पहल की, लेकिन पाकिस्तान ने हर बार उसे आगे बढ़ाने में सहयोग नहीं किया।

क्वात्रा के अनुसार, इससे भारत की जल संसाधन क्षमता और पनबिजली विकास परियोजनाओं पर असर पड़ा।


पाकिस्तान के जल संकट पर भी टिप्पणी

भारत के राजदूत ने पाकिस्तान में बढ़ते जल संकट के लिए वहां की आंतरिक नीतियों और कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने के बजाय:


आतंकवाद खत्म करने की शर्त

क्वात्रा ने स्पष्ट कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में भारत के साथ सामान्य संबंध और सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को पूरी तरह समाप्त करना होगा

उन्होंने दोहराया कि भारत का रुख स्पष्ट है—राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा


सिंधु जल संधि क्यों महत्वपूर्ण है?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे का आधार मानी जाती है। इसे लंबे समय तक दोनों देशों के बीच सबसे स्थिर समझौतों में गिना जाता रहा है।

हालांकि, हाल के वर्षों में सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों के कारण इस संधि को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक बहस तेज हुई है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या असर पड़ सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस रुख से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान जल सुरक्षा और आतंकवाद के संबंध पर जा सकता है। पाकिस्तान की कोशिश होगी कि वह इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहे, जबकि भारत इसे सुरक्षा और पारस्परिक विश्वास से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।

Indus Waters Treaty India Pakistan विवाद में भारत ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं थी, बल्कि सद्भावना और मित्रता की भावना पर आधारित व्यवस्था थी। उनके अनुसार, यदि पाकिस्तान सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को समाप्त कर विश्वास बहाली की दिशा में कदम उठाने होंगे

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