
नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखा। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने लंबित वित्तीय सहायता और विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त सहयोग की मांग की।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से झारखंड के 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के कोयला रॉयल्टी बकाया का शीघ्र भुगतान करने की मांग दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत राज्य को मिलने वाली शेष 6 हजार करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने का भी आग्रह किया। उनका कहना था कि झारखंड देश की खनिज संपदा का प्रमुख केंद्र है और राज्य के समग्र विकास के लिए केंद्र का सहयोग बेहद आवश्यक है।
बैठक के दौरान हेमंत सोरेन ने झारखंड को मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में विकसित करने की अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को भी साझा किया। उन्होंने टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों और रिसर्च एवं इनोवेशन केंद्रों की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री ने कई अहम प्रस्ताव रखे। उन्होंने राज्य में पीएम श्री स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने, एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने तथा मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पांच हजार उत्कृष्ट विद्यालयों के निर्माण के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है।
खेलों के विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने झारखंड में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के मानकों में आवश्यक संशोधन करने की जरूरत पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ झारखंड भी विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।