
दिल्ली से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने राजधानी में छात्रों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साउथ-वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें छात्रों के लिए PG की सुविधा संचालित की जा रही थी। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे फंसे लोगों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे।
मौजूदा जानकारी के मुताबिक इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी रहा। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को खोजने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया। सोमवार तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।
छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल हो रही थी इमारत
जिस इमारत के गिरने से यह बड़ा हादसा हुआ, उसका इस्तेमाल बॉयज PG और हॉस्टल के तौर पर किया जा रहा था। यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित थी और यहां आसपास के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे।
रिपोर्टों के मुताबिक इमारत में करीब 75 बेड की PG व्यवस्था थी। हादसे के वक्त इमारत में कितने लोग मौजूद थे, इसे लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई थी। यही वजह है कि शुरुआती घंटों में सबसे बड़ी चिंता मलबे के नीचे फंसे छात्रों और अन्य लोगों को लेकर थी।
हादसे के बाद आसपास के दूसरे PG और भवनों को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गईं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के कुछ PG खाली करवाए और प्रभावित छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
बेसमेंट में चल रहा था काम
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत और निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। जांच एजेंसियां इस पहलू को भी गंभीरता से देख रही हैं कि क्या बेसमेंट में चल रहे काम से इमारत की संरचना कमजोर हुई।
AP की रिपोर्ट के अनुसार इमारत काफी पुरानी थी और हाल में इसमें मरम्मत का काम हुआ था। पानी जमा होने और बेसमेंट में चल रहे काम को संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है, हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस घटना ने पुराने और जर्जर भवनों में बिना पर्याप्त संरचनात्मक जांच के निर्माण या मरम्मत कार्य किए जाने पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
MCD पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जिस इमारत को केवल सीमित मंजिलों के निर्माण की अनुमति थी, उसमें उससे कहीं ज्यादा मंजिलें बनाई गई थीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इलाके में चार मंजिल से ज्यादा ऊंची अवैध संरचनाओं की पहचान कर उन्हें सील करने की कार्रवाई की बात सामने आई है।
हादसे के बाद MCD ने दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें चार इंजीनियर भी शामिल हैं। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि अगर इमारत में नियमों का उल्लंघन हुआ था तो समय रहते उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
PG मालिक गिरफ्तार
हादसे के बाद इमारत का मालिक फरार बताया जा रहा था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और बाद में उसे राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और पुलिस निर्माण तथा सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इमारत को PG के तौर पर चलाने के लिए जरूरी नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना थी। बचाव दलों ने भारी मशीनों, स्निफर डॉग्स और अन्य उपकरणों की मदद से मलबे को हटाने का काम किया।
मलबे में फंसे कुछ छात्रों ने कथित तौर पर फोन के जरिए मदद की गुहार भी लगाई थी। ऐसे में बचाव दलों के सामने चुनौती थी कि मलबा हटाते समय नीचे फंसे किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमों के साथ स्थानीय लोगों ने भी मदद की। हादसे की भयावहता को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
हादसे ने फिर उठाया छात्र सुरक्षा का सवाल
सत्य निकेतन की यह घटना दिल्ली में PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है। राजधानी में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आने वाले छात्र PG और किराये के कमरों में रहते हैं।
ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इन भवनों की नियमित structural safety audit, फायर सेफ्टी जांच और निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। खासकर पुराने भवनों में बिना अनुमति के अतिरिक्त मंजिलें बनाने या बेसमेंट में संरचनात्मक बदलाव करने पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
दिल्ली सरकार की ओर से भी सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों, हॉस्टल और अन्य भवनों की सुरक्षा को लेकर नए कदम उठाने की बात सामने आई है।
फिलहाल सत्य निकेतन हादसे की जांच जारी है। पुलिस PG मालिक और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जबकि MCD अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि अगर निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों की समय रहते जांच की जाए तो ऐसी त्रासदियों को कितना रोका जा सकता है। मृतकों के परिवारों के लिए यह घटना कभी न भूलने वाला दुख है, जबकि घायल छात्रों और उनके परिवारों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई और जांच के नतीजों पर है।