जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर आदिवासी संगठनों का ‘दिल्ली चलो’ अभियान, देशभर में आंदोलन की तैयारी

करीब 15 आदिवासी संगठनों ने वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का ऐलान किया।

जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर आदिवासी संगठनों का ‘दिल्ली चलो’ अभियान, देशभर में आंदोलन की तैयार

 

Delhi Chalo Tribal Protest को लेकर देशभर के आदिवासी संगठनों ने बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की मांग को लेकर करीब 15 आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से ‘दिल्ली चलो’ अभियान का ऐलान किया है। इस अभियान का उद्देश्य आदिवासी समाज से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाना और उनके समाधान की मांग करना है।

आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले आदिवासी समुदाय आज भी अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के पूर्ण क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई क्षेत्रों में वन अधिकार कानून का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है, जिससे बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

आदिवासी नेताओं के अनुसार इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा वन अधिकार कानून (Forest Rights Act) का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन है। उनका कहना है कि कानून बनने के बावजूद कई पात्र परिवारों को अब तक वन भूमि पर अधिकार नहीं मिल पाया है। संगठनों की मांग है कि लंबित दावों का शीघ्र निपटारा किया जाए और कानून का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

इसके अलावा आंदोलन में भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। संगठनों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर कई स्थानों पर आदिवासी परिवारों का विस्थापन हुआ है, लेकिन उन्हें पर्याप्त पुनर्वास और रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।

आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और आजीविका का आधार हैं। इसलिए इन अधिकारों की रक्षा करना संविधान की भावना के अनुरूप भी आवश्यक है।

संगठनों ने स्पष्ट किया है कि ‘दिल्ली चलो’ अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है। आंदोलन के दौरान विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में आदिवासी प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

आदिवासी संगठनों ने केंद्र सरकार से जल्द वार्ता शुरू करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि सरकार समय रहते बातचीत करती है तो कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान आपसी सहमति से निकाला जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अभियान बड़े स्तर पर आयोजित होता है तो इसका राष्ट्रीय राजनीति और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े नीतिगत फैसलों पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इस अभियान को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल देशभर की नजर इस प्रस्तावित ‘दिल्ली चलो’ अभियान पर टिकी हुई है। अब देखना होगा कि सरकार आदिवासी संगठनों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।

संगठनों ने स्पष्ट किया है कि ‘दिल्ली चलो’ अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है। आंदोलन के दौरान विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में आदिवासी प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

आदिवासी संगठनों ने केंद्र सरकार से जल्द वार्ता शुरू करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि सरकार समय रहते बातचीत करती है तो कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान आपसी सहमति से निकाला जा सकता है।

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