
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी देहरादून के प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी इलाके में टौंस नदी पर बना करोड़ों रुपये की लागत वाला नवनिर्मित पुल अचानक धंस गया। पुल के बीचों-बीच बड़ा गड्ढा बनने के बाद प्रशासन ने तत्काल यातायात बंद कर दिया है। घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मॉनसून के इस मौसम में उत्तराखंड के कई जिलों में लगातार भारी बारिश दर्ज की जा रही है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है। इसी बीच देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में टौंस नदी पर बने इस नए पुल के धंसने की खबर सामने आने से स्थानीय प्रशासन और निर्माण एजेंसियों में हड़कंप मच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह के समय अचानक पुल के मध्य भाग में दरारें दिखाई दीं और कुछ ही देर में उसका एक हिस्सा नीचे बैठ गया। देखते ही देखते पुल के बीचों-बीच बड़ा गड्ढा बन गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय पुल से कोई वाहन या राहगीर नहीं गुजर रहा था। यदि यह घटना व्यस्त समय में होती तो बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता था।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। सुरक्षा के मद्देनज़र पुल पर सभी प्रकार की आवाजाही तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है और लोगों को पुल से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी है ताकि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न करे।
इस पुल के बंद होने से आसपास के कई ग्रामीण इलाकों का देहरादून शहर से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों को अब लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, कामकाजी लोगों और व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल उनके लिए वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या का समाधान बनने वाला था, लेकिन इसके धंसने से उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने पुल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में जल्दबाजी की गई और गुणवत्ता मानकों का ठीक से पालन नहीं किया गया। कई ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए ताकि यह पता चल सके कि पुल भारी बारिश के कारण धंसा या निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही हुई।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गरमाता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस नेता आर्येंद्र शर्मा ने सरकार और निर्माण एजेंसी पर लापरवाही तथा संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि नया पुल कुछ ही समय में धंस जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में पुल निर्माण के दौरान भूगर्भीय स्थिति, नदी के बहाव, मिट्टी की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। लगातार बारिश और तेज बहाव के कारण नदी के किनारों पर कटाव बढ़ जाता है, जिससे पुल की नींव पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल संबंधित विभाग पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का विस्तृत निरीक्षण कर रहा है। इंजीनियरिंग विशेषज्ञ यह जांच कर रहे हैं कि पुल की नींव, पिलर और ऊपरी संरचना में किस स्तर तक नुकसान हुआ है। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की मरम्मत, पुनर्निर्माण या अन्य कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
उत्तराखंड में हर साल मॉनसून के दौरान भूस्खलन, सड़क धंसने और पुल क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में यह घटना राज्य में बुनियादी ढांचे की मजबूती और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्माण परियोजनाओं की नियमित निगरानी और स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण जरूरी हैं।
फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें। टौंस नदी पर बने इस पुल की तकनीकी जांच पूरी होने तक वहां आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। देहरादून में लगातार जारी भारी बारिश के बीच यह घटना राज्य सरकार और संबंधित विभागों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।