CJP Tiranga March 2026: तिरंगा मार्च पर रोक नहीं, दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट के निर्देश

CJP Tiranga March: दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक से इनकार किया, पुलिस को कानून के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए।

CJP Tiranga March 2026: तिरंगा मार्च पर रोक नहीं, दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट के निर्देश

 

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह मार्च 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित करने का ऐलान किया गया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के तहत जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

 

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी के दो नेताओं की गिरफ्तारी के बाद संगठन ने नए प्रदर्शन का आह्वान किया है। दूसरी ओर, कनॉट प्लेस के एक दुकानदार ने आशंका जताई थी कि प्रदर्शन के कारण कारोबार और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

 

हाई कोर्ट ने मार्च पर रोक लगाने से किया इनकार

 

दिल्ली हाई कोर्ट में CJP और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके के प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। अदालत ने प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया। हालांकि, उसने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को दर्ज किया कि स्थिति को संभालने के लिए कानून के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

 

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने की। अदालत के सामने यह चिंता रखी गई कि कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त व्यावसायिक इलाके में प्रदर्शन होने से दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और आम लोगों को परेशानी हो सकती है।

 

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत का रोक लगाने से इनकार करना, प्रदर्शन के लिए हर प्रकार की अनुमति दिए जाने के समान नहीं है। पुलिस को कानून के तहत भीड़, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर जरूरी कदम उठाने होंगे।

 

16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित है मार्च

 

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। इस कार्यक्रम को ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम दिया गया है।

 

पार्टी की ओर से यह आह्वान उसके दो साथियों आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी के विरोध में किया गया है। संगठन ने समर्थकों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील की है।

 

कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें, कार्यालय, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। ऐसे में किसी बड़े जमावड़े के दौरान यातायात और पैदल आवाजाही को व्यवस्थित रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

 

आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी का मामला

 

CJP के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई।

 

इन गिरफ्तारियों के विरोध में पार्टी ने तिरंगा मार्च का ऐलान किया। हालांकि, गिरफ्तारी से जुड़े आरोपों और कानूनी प्रक्रिया का अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्राधिकारियों और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

 

CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन इसी घटनाक्रम से जुड़ा है। पार्टी के समर्थक इसे विरोध और राष्ट्रीय ध्वज के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने का कार्यक्रम बता रहे हैं। वहीं, प्रशासन के सामने सार्वजनिक व्यवस्था और कानून का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

 

दुकानदार ने याचिका में क्या चिंता जताई?

 

पालिका बाजार के दुकानदार अनिल कुमार गुप्ता ने अदालत में याचिका दायर कर प्रदर्शन से व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। याचिका में आशंका व्यक्त की गई कि प्रदर्शन के कारण इलाके में कारोबार प्रभावित हो सकता है और दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

 

कनॉट प्लेस और पालिका बाजार में रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और अन्य कामों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान भीड़ और यातायात का प्रबंधन स्थानीय कारोबारियों के साथ-साथ ग्राहकों और यात्रियों के लिए भी अहम है।

 

अदालत ने पुलिस के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। अब पुलिस की जिम्मेदारी होगी कि वह कानून के दायरे में रहते हुए आवश्यक व्यवस्था करे।

 

दिल्ली पुलिस को कानून के तहत कदम उठाने के निर्देश

 

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को भरोसा दिया गया कि प्रस्तावित प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने इसी आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।

 

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना, जरूरत के अनुसार भीड़ और यातायात का प्रबंधन करना तथा कानून के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष कार्रवाई या प्रतिबंध की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक सूचना से ही होगी।

 

इस मामले में अदालत ने प्रदर्शन पर पूर्ण रोक लगाने के बजाय पुलिस के आश्वासन के आधार पर आगे की व्यवस्था पर भरोसा किया है। इससे प्रदर्शन के आयोजन और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है।

 

अगली सुनवाई 3 नवंबर को

 

मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों की दलीलों और मामले की स्थिति पर विचार किया जा सकता है।

 

फिलहाल, अदालत ने प्रस्तावित तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया है और दिल्ली पुलिस को कानून के मुताबिक आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या व्यवस्था रहेगी, यह पुलिस की तैयारी और मौके की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

 

निष्कर्ष: CJP के 16 अक्टूबर को प्रस्तावित तिरंगा मार्च को रोकने की मांग दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं की। अदालत ने दिल्ली पुलिस का आश्वासन दर्ज किया कि प्रदर्शन को कानून के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।

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