Bokaro News: जर्जर स्कूल भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे, बरामदे में लग रही कक्षाएं

बोकारो के चास स्थित प्राथमिक विद्यालय स्पेशल हरिजन में कमरों की कमी, टपकती छत और जर्जर भवन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों ने नए भवन के निर्माण और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

Bokaro News: झारखंड के बोकारो जिले के चास स्थित प्राथमिक विद्यालय स्पेशल हरिजन की बदहाल स्थिति सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वर्षों पुराने इस विद्यालय में आज भी बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ रही है। कमरों की कमी, जर्जर भवन, बारिश में टपकती छत और खराब पेयजल व्यवस्था के कारण न सिर्फ छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि शिक्षकों के सामने भी रोज नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 72 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इन बच्चों की पढ़ाई के लिए केवल दो कमरे और एक बरामदा उपलब्ध है। सीमित जगह होने के कारण कई बार एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है। जब मौसम खराब होता है या कमरों में पानी भर जाता है, तब बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। इससे पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित होता है और विद्यार्थियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

विद्यालय भवन का निर्माण वर्ष 1972 में हुआ था। पांच दशक से अधिक पुराने इस भवन की स्थिति अब काफी जर्जर हो चुकी है। कई जगह दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जबकि छत का प्लास्टर भी उखड़ चुका है। बारिश के दौरान कमरों की छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल हो जाता है। कई बार शिक्षकों को बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाने के लिए कक्षाएं बीच में ही बदलनी पड़ती हैं।

विद्यालय में दो सरकारी शिक्षिकाएं और एक सहायक शिक्षक कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालांकि पर्याप्त कक्षाओं और सुरक्षित भवन के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना आसान नहीं रह गया है।

स्कूल परिसर में पेयजल व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। परिसर में लगे दोनों चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं। फिलहाल पास के डीप बोरिंग से पाइपलाइन के जरिए पानी की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। वहीं बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय तो बने हैं, लेकिन उनकी स्थिति भी काफी खराब हो चुकी है। नियमित मरम्मत नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को इनका उपयोग करने में परेशानी होती है।

विद्यालय में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना भी संसाधनों की कमी से प्रभावित हो रही है। रसोईघर छोटा होने के कारण भोजन तैयार करने और वितरण में कठिनाई होती है। बरसात के मौसम में यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है।

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि नए भवन के निर्माण के लिए कई बार संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रभारी प्राचार्य मंजुला कुमारी के अनुसार नए भवन के निर्माण और अतिरिक्त कक्षों की मांग को लेकर विभाग को तीन बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता है, लेकिन वर्तमान भवन की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी विद्यालय की स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में उन्हें बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से जल्द नए भवन के निर्माण, अतिरिक्त कक्ष, बेहतर पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की मरम्मत और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल अच्छे शिक्षकों से ही संभव नहीं है, बल्कि सुरक्षित भवन, पर्याप्त कक्षाएं, स्वच्छ पेयजल और बेहतर आधारभूत सुविधाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ सकता है।

फिलहाल चास के इस सरकारी विद्यालय की स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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