
हूल दिवस से पहले भोगनाडीह के ग्राम प्रधान समेत 53 लोगों को नोटिस, प्रशासन अलर्ट
झारखंड के साहिबगंज जिले के ऐतिहासिक भोगनाडीह गांव में आयोजित होने वाले 171वें अमर शहीद सिद्धू-कानू मुर्मू हूल दिवस समारोह से पहले प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। समारोह के दौरान शांति एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए भोगनाडीह के ग्राम प्रधान बबलू हासंदा, सिद्धू-कानू के वंशज मंडल मुर्मू समेत विभिन्न थाना क्षेत्रों के कुल 53 लोगों को नोटिस जारी किया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है, वहीं संबंधित लोगों ने इसका विरोध भी दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई बरहेट थाना प्रभारी की ओर से भेजे गए प्रतिवेदन के आधार पर की गई है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) साहिबगंज अमर जॉन आईन्द की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 135 के तहत संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी को 29 जून 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित व्यक्तियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 111 के तहत 10 हजार रुपये अथवा समान राशि की दो प्रतिभूतियों के साथ एक वर्ष का बॉन्ड भरना होगा। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई केवल एहतियात के तौर पर की गई है ताकि समारोह के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
भोगनाडीह गांव झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के आदिवासी इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहीं से वर्ष 1855 में सिद्धू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ ऐतिहासिक संताल हूल आंदोलन की शुरुआत हुई थी। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में लोग हूल दिवस मनाने पहुंचते हैं। राज्य सरकार, विभिन्न सामाजिक संगठन और हजारों आदिवासी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इस ऐतिहासिक स्थल पर एकत्रित होते हैं।
इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा हुआ है। प्रशासन का मानना है कि बड़ी भीड़ के दौरान किसी भी तरह की अफवाह, विवाद या अप्रिय घटना से बचने के लिए पहले से एहतियाती कदम उठाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संभावित रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों को नोटिस जारी किया गया है।
हालांकि प्रशासन की इस कार्रवाई का स्थानीय स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है। भोगनाडीह के ग्राम प्रधान बबलू हासंदा, सिद्धू-कानू के वंशज मंडल मुर्मू तथा अन्य लोगों ने नोटिस जारी किए जाने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हूल दिवस आदिवासी समाज के स्वाभिमान, इतिहास और गौरव का प्रतीक है। ऐसे आयोजन से पहले इस प्रकार की कार्रवाई समाज में गलत संदेश देती है और लोगों की भावनाओं को आहत करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हर वर्ष शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम का आयोजन करते हैं और प्रशासन को सहयोग भी देते हैं। उनका मानना है कि बिना किसी ठोस कारण के बड़ी संख्या में लोगों को नोटिस देना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
प्रशासन की सतर्कता के पीछे वर्ष 2025 का अनुभव भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। पिछले वर्ष हूल दिवस समारोह के दौरान भोगनाडीह में हंगामा और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। कार्यक्रम के दौरान कुछ मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा था, जिसके कारण प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी। इसी घटना को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले से एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय को परेशान करना नहीं है, बल्कि समारोह को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है। अधिकारियों के अनुसार यदि सभी लोग सहयोग करेंगे तो कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सकेगा।
हूल दिवस झारखंड और आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। हर वर्ष हजारों लोग सिद्धू-कान्हू मुर्मू सहित अन्य वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने भोगनाडीह पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों और प्रशासन की नजर बनी हुई है। आगामी 29 जून को संबंधित लोगों की न्यायालय में उपस्थिति के बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। वहीं प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि हूल दिवस समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।